23 करोड़ का भुगतान नहीं करने पर उदयपुर कलेक्‍टर की कुर्सी न्‍यायालय के आदेश के बाद कुर्क

उदयपुर. उदयपुर-डबोक-चित्तौड़ राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने वाली केएमसी कंस्ट्रक्शन लिमिटेड कम्पनी का 24 वर्ष तक 9.98 करोड़ रूपए का भुगतान नहीं करने पर गुरुवार को अदालत के आदेश से सेल अमीन ने जिला कलेक्टर की कुर्सी को कुर्क कर लिया और मौतबीर को सुपुर्द कर दी. कलेक्ट्री से कोर्ट तक कुर्सी को हाथ ठेले में प्रदर्शन करते हुए ले जाया गया. जिस समय कुर्सी सीज की जा रही थी, उस समय जिला कलेक्टर वीडियो कांफे्रंसिंग रूम में बैठे हुए थे. आज की तारीख में ब्याज सहित यह राशि 9.98 करोड़ से बढ़कर 23 करोड़ से अधिक तक पहुंच गई है. संभाग में किसी कलेक्टर या उच्चाधिकारी की कुर्सी सीज होने की यह पहली कार्यवाही प्रतीत होती है.

हुआ यूं कि अपर जिला एवं सत्र न्यायालय क्रम-1 द्वारा इसी वर्ष 6 जनवरी को मैसर्स केएमसी कंस्ट्रक्शन कम्पनी लिमिटेड बनाम राज्य सरकार के मामले में 9 करोड़ 98 लाख 66 हजार 297 रूपए की वसूली के लिए जिला कलेक्टर एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता की चल सम्पति को कुर्क करने के आदेश दिए थे. लम्बा समय गुजर जाने के बाद भी विभाग द्वारा कम्पनी को राशि का भुगतान नहीं किया गया. इस पर अदालत के आदेश की पालना में गुरुवार को सेल अमीन अल्लानूर मोहम्मद मय टीम के कम्पनी के अधिवक्ता संजय कोठारी के साथ जिला कलेक्ट्री में जिला कलेक्टर की कुर्सी को कुर्क करने के लिए पहुंचे. जिला कलेक्टर जिस कुर्सी पर बैठकर न्यायालय का संचालन करते हैं उस कुर्सी को सेल अमीन के निर्देशानुसार प्रोसेस सर्वर प्रमोद शर्मा ने कुर्सी के आगे-पीछे दोनों तरफ कुर्की के कागज चस्पा कर दिए. करीब 12-13 मिनिट तक कुर्की की प्रक्रिया पूरी की गई और उसके बाद कुर्सी को उठा कर कलेक्ट्री कक्ष से बाहर लाया गया और पार्टी द्वारा मंगवा कर रखे हाथ ठेला गाड़ी में कुर्सी को रखा गया और उसे कलेक्ट्री से होते हुए अदालत परिसर में ले गए जहां पर सेल अमीन ने भुवाणा निवासी मौतबिर कार्तिक पुत्र संजीव सामर को सौंप दी. कार्तिक कुर्क कुर्सी को अपने घर लेकर रवाना हो गए. जिला कलेक्टर की कुर्सी कुर्क होकर अदालत परिसर तक लाई जाने से हर कोई इस दृश्य को आश्चर्यचकित दृष्टि से देख रहा था. उगेखनीय है कि मैसर्स केएमसी कंस्ट्रक्शन कम्पनी ने उदयपुर-डबोक होते हुए चित्तौड़ तक का राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण वर्ष 1990 से 1995 तक किया था. सड़क निर्माण पूरा होने पर भी सार्वजनिक निर्माण विभाग नेशनल हाईवे द्वारा भुगतान नहीं करने पर कम्पनी को अदालत की शरण में जाना पड़ा.

साढ़े तीन घंटे तक चली कवायद

गुरुवार को 9 करोड़ 98 लाख 66 हजार 267 रूपए की वसूली के लिए सेल अमीन करीब साढ़े 11 बजे जिला कलेक्टर से मिले, लेकिन इस मामले में कोई तवज्जो नहीं दी. साढ़े 11 बजे से अपरान्ह ढाई बजे तक कुर्सी सीज करने की कवायद चलती रही, लेकिन जिला कलेक्ट्री के विधिक सलाहकार चांदमल पालीवाल ने कुर्सी सीज न हो इसके लिए काफी प्रयास किए. करीब तीन घंटे तक जद्दोजद चलती रही. वे यह लिखकर देने लगे कि एक माह में हाईकोर्ट के निर्देशानुसार भुगतान कर देंगे, लेकिन कम्पनी के अधिवक्ता इस बात को मानने को तैयार नहीं थे. वे यह चाहते थे कि कलेक्टर या विभाग यह लिखकर दे कि एक माह में कम्पनी को भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन जिला कलेक्टर ने इस हेतु साफ इनकार कर दिया इस पर विधिक सलाहकार ने कहा कि सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता की कुर्सी सीज कर ली जाए तो सेल अमीन ने कहा कि उसके पास केवल जिला कलेक्टर व पीडब्ल्यूडी वल्लभनगर के अधिशाषी अभियंता की कुर्सी सीज करने के आदेश है. इसके अलावा वह अन्य किसी की कुर्सी सीज नहीं कर सकता. इस दौरान जिला कलेक्टर ने भुगतान के लिए लिखकर देने से साफ इनकार कर देने पर सेल अमीन ने कुर्सी को सीज करवा दिया.

यूं चला मामला

मैसर्स केएमसी कंस्ट्रक्शन कम्पनी लिमिटेड बनाम राज्य सरकार के मामले में मध्यस्थतम एवं सुलह अधिकारी (आर्बिटे्रशन ट्रूबिनल) एस.सी. मित्तल ने 19 सितम्बर 2011 को राज्य सरकार के खिलाफ आदेश पारित कर उदयपुर से डबोक होते हुए चित्तौड़ तक राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने वाली केएमसी कंस्ट्रक्शन कम्पनी के पक्ष में 9 करोड़ 98 लाख 66 हजार 297 रूपए का अवार्ड पारित किया. साथ ही राज्य सरकार को आदेश दिए कि यदि कम्पनी को छह माह में भुगतान कर दिया जाता है तो सरकार को इस राशि पर कोई ब्याज नहीं देना पड़ेगा. इस पर राज्य सरकार ने कम्पनी को भुगतान नहीं किया और इसके खिलाफ अपर जिला एवं सत्र न्यायालय क्रम-1 में अपील कर दी. सुनवाई के बाद अदालत में 29 मई 2015 को अपील खारिज कर दी, लेकिन उसके बावजूद भी सरकार की ओर से कम्पनी को भुगतान नहीं किया गया.

राशि हुई 23 करोड़ से अधिक

सरकार द्वारा केएमसी कम्पनी को राशि का भुगतान नहीं करने पर 18 सितम्बर 2011 को आदेश के अनुसार सरकार 9 करोड़ 98 लाख 66 हजार 267 रूपए अदायगी तिथि तक 18 प्रतिशत ब्याज का भुगतान पृथक से करेगी इस पर आज तक के हिसाब से ब्याज की राशि और मूल राशि मिलाकर 23 करोड़ से अधिक की हो चुकी है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 सितम्बर को होगी.

कलेक्टर बैठे रहे और कुर्सी हो गई कुर्क

कुर्सी को कुर्क करने की कवायद उधर सेल अमीन द्वारा की जा रही थी, विधिक सलाहकार कुर्सी को कुर्क होने से बचाने के लिए अपने दांवपेच लगा रहे थे. इस दौरान जिला कलेक्टर बिष्णु चरण मल्लिक कलेक्ट्री पहुुंच गए और अपने कक्ष में नहीं आकर सीधे वीडियो कांफे्रंसिंग रूम में पहुंच गए और वहीं पर विधिक सलाहकार व अपने निजी सलाहकार से बात की. निजी सलाहकार के कहने पर कम्पनी के अधिवक्ता कलेक्टर के पास गए तो कलेक्टर ने स्पष्ट मना कर दिया कि वे लिखकर नहीं देंगे मामले की अपील हाईकोर्ट में की गई है. छह माह का समय लगेगा जो कम्पनी के अधिवक्ता देने को तैयार नहीं थे. कुर्सी कुर्क होने की बात कहने पर कलेक्टर ने मौन सहमति प्रदान कर दी. कलेक्टर वीसी कमरे में अधिकारियों के साथ बैठे रहे और इधर कुर्सी कुर्क कर ले गए. कुर्सी कुर्क करने के दौरान पुलिस महकमे के अलावा कलेक्ट्री में संचालित अन्य कक्ष के कर्मचारी व अधिकारी इस दृश्य को देख रहे थे.

Report By Udaipur Kiran

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