
New Delhi, 4 सितंबर . Enforcement Directorate (ईडी) ने 40 करोड़ रुपये के हैशपे क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
ईडी के चेन्नई जोनल ऑफिस-II ने इस मामले में 1 सितंबर 2026 को चेन्नई, कोयंबटूर और कोलकाता में 11 ठिकानों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत तलाशी अभियान चलाया था.
ईडी ने बताया कि जांच पुडुचेरी साइबर क्राइम Police द्वारा अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज First Information Report के आधार पर शुरू की गई थी.
जांच में पता चला कि हितेश कुमार, इमरान बाशा और सैयद उस्मान उर्फ बाबू ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर “हैशपे” नाम से एक फर्जी निवेश योजना शुरू की थी. इसे क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के रूप में पेश किया गया था. आम लोगों को “टीसीएक्स” नामक क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेडिंग के जरिए आकर्षक रिटर्न का झूठा वादा कर निवेश के लिए प्रेरित किया गया.
ईडी के अनुसार, आरोपियों ने निवेशकों को लुभाने के लिए भव्य प्रमोशनल कार्यक्रम आयोजित किए, Bollywood हस्तियों को शामिल किया और social media पर बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान चलाया. हैशपे टोकन के मूल्य को कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया ताकि और निवेश आकर्षित किया जा सके. बाद में निवेशकों के पैसे निकालने पर रोक लगा दी गई और जुटाई गई रकम को शेल कंपनियों, सहयोगियों और आरोपियों के रिश्तेदारों से जुड़े बैंक खातों में डायवर्ट कर दिया गया.
बैंक खातों के विश्लेषण से पता चला कि आरोपियों ने इस तरह से लगभग 40 करोड़ रुपये जुटाए थे, जिसे बाद में मनी लॉन्ड्रिंग के लिए डायवर्ट और लेयर किया गया. जांच में यह भी सामने आया कि निवेशकों की रकम का एक बड़ा हिस्सा इमरान बाशा और हितेश कुमार के निजी बैंक खातों के साथ-साथ उनसे और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़ी व्यावसायिक संस्थाओं में भेजा गया. अपराध से अर्जित आय का इस्तेमाल आलीशान जीवनशैली और अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया.
तलाशी अभियान के दौरान अपराध से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए गए. इसके बाद इमरान बाशा और हितेश कुमार को 3 सितंबर को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया और पीएमएलए की विशेष अदालत में पेश किया गया, जिसने दोनों आरोपियों को पांच दिन की हिरासत में भेज दिया है. ईडी ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है.
–
डीएससी
Skip to content