
वाशिंगटन, 20 अक्टूबर . बांग्लादेश की पूर्व Prime Minister शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद जॉय ने आरोप लगाया कि 2024 में उनकी मां की Government को गिराने वाले विरोध-प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका का हाथ था.
वॉशिंगटन में ‘सेंटर फॉर यूएस-बांग्लादेश रिलेशंस’ की ओर से आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए जॉय ने दावा किया कि तत्कालीन बाइडेन प्रशासन ने ऐसी गतिविधियों का समर्थन किया, जिन्होंने अगस्त 2024 में हसीना Government को हटाने में योगदान दिया.
जॉय का आरोप था कि ‘यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट’ (यूएसएआईडी) और लोकतंत्र को बढ़ावा देने वाले कुछ संगठनों ने विरोध प्रदर्शनों में शामिल समूहों को संगठित करने में मदद की. उन्होंने कहा, “बिल्कुल, बाइडेन प्रशासन इस शासन परिवर्तन में गहराई से शामिल था. यूएसएआईडी ने इसके लिए 50 मिलियन डॉलर की फंडिंग दी थी.”
जॉय ने ‘नेशनल डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूट’ और ‘इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट’ पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने उन समूहों को संगठित और प्रशिक्षित करने में मदद की, जो बाद में अशांति और प्रदर्शनों में शामिल हुए.
हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जॉय ने ऐसा कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया जिससे यह साबित हो सके कि अमेरिकी सरकारी फंड का उद्देश्य शेख हसीना की Government को गिराना था. उनके आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी नहीं हो सकी है.
जॉय ने दावा किया कि अंतरिम Government के पूर्व प्रमुख मुहम्मद यूनुस को बांग्लादेश की सैन्य नेतृत्व पर अमेरिकी दबाव के बाद सत्ता में लाया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि ढाका में अमेरिकी राजदूत ने यूनुस को अंतरिम प्रशासन का प्रमुख बनाने में प्रभाव डाला. ये आरोप ऐसे Political माहौल में लगाए गए, जहां कार्यक्रम में हसीना की आवामी लीग के समर्थक और कुछ पूर्व अधिकारी भी मौजूद थे.
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बात करते हुए जॉय ने आरोप लगाया कि हसीना के बाद सत्ता में आई व्यवस्था ने दोषी करार दिए गए उग्रवादियों को रिहा कर दिया और चरमपंथी संगठनों को फिर से प्रभाव बढ़ाने का मौका दिया. उन्होंने दावा किया कि ऐसे कैदियों को छोड़ा गया जिनका संबंध विदेशी नागरिकों पर हमलों से था. साथ ही उन्होंने कहा कि Pakistan से जुड़े कुछ उग्रवादी समूहों की गतिविधियां बांग्लादेश में बढ़ी हैं.
जॉय ने यह भी आरोप लगाया कि लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कुछ लोग बांग्लादेश में सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई दिए हैं. उनके मुताबिक, ये घटनाक्रम India और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हो सकते हैं, खासकर ऐसे समय में जब बांग्लादेश के Political और सुरक्षा संबंध लगातार बदल रहे हैं.
उन्होंने ढाका की मौजूदा व्यवस्था पर चीन के साथ संबंध मजबूत करने का भी आरोप लगाया और कहा कि शेख हसीना के सत्ता से जाने के बाद चीनी कंपनियों को फायदा हुआ है. जॉय ने दावा किया कि चीनी कंपनियों के साथ कारोबारी रिश्तों में भ्रष्टाचार ने भी भूमिका निभाई है.
अमेरिका के साथ आर्थिक संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने बांग्लादेश की बड़े व्यावसायिक समझौतों को पूरा करने की क्षमता पर सवाल उठाए. उन्होंने अमेरिकी ऊर्जा कंपनी एक्सेलरेट एनर्जी और विमान निर्माता ‘बोइंग’ के साथ हुए समझौतों का जिक्र करते हुए कहा कि बांग्लादेश के पास अपने दायित्व पूरे करने के लिए पर्याप्त धन नहीं है.
उन्होंने कहा, “उन्होंने 29 बोइंग विमानों का अनुबंध किया है, लेकिन बांग्लादेश Government के पास उनका भुगतान करने के लिए पैसा नहीं है.”
जॉय ने दावा किया कि मौजूदा समझौतों के तहत अमेरिकी ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं को पूरा भुगतान नहीं मिल रहा है. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार न तो संबंधित कंपनियों और न ही बांग्लादेश Government ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी.
इस बीच, हसीना Government में काम कर चुके पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अहमद कैकाउस ने अलग से कहा कि Political अस्थिरता और कमजोर होती संस्थाएं निवेशकों के भरोसे को नुकसान पहुंचा रही हैं और आर्थिक विकास के लिए खतरा बन रही हैं.
उन्होंने कहा कि अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को बांग्लादेश में Political विभाजन बढ़ाने के बजाय संवाद, निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया और शांतिपूर्ण Political प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना चाहिए.
ये आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं, जब अगस्त 2024 में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना की Government सत्ता से बाहर हो गई थी. उनकी Government पर सत्ता में रहते हुए Political दमन, विवादित चुनावों और प्रदर्शनकारियों से निपटने के तरीके को लेकर आलोचना होती रही थी.
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एवाई/डीकेपी
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