
भुवनेश्वर, 25 अक्टूबर . Odisha के भुवनेश्वर में Prime Minister Narendra Modi ने Sunday को भारतीय रिजर्व बैंक के नवस्थापित डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि आज भुवनेश्वर नए India को एक नया संस्थान दे रहा है. भुवनेश्वर में आरबीआई का डेटा सेंटर और साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का उद्घाटन एक महत्वपूर्ण अवसर है. ये Odisha और देश के लोगों के लिए बहुत हितकारी होने वाले हैं.
उन्होंने कहा कि मैं इस परियोजना से जुड़े सभी लोगों को बधाई देता हूं. आज का यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि India में गवर्नेंस की अप्रोच कैसे और कितनी तेजी से बदल रही है. हमारा ध्यान है, विकास की प्राथमिकता, विस्तार और आखिरी व्यक्ति तक पहुंच. आजादी के बाद देश में बड़े-बड़े शहरों का विकास हुआ, बड़े संस्थान बने, बड़े अस्पताल और बड़े एयरपोर्ट भी बने, लेकिन देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा बुनियादी सुविधाओं का इंतजार करता रहा था. दिल्ली में बड़े अस्पताल थे, लेकिन छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों में बेहतर इलाज के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी. बड़े शहरों में हवाई यात्रा की सुविधा थी, लेकिन छोटे शहरों को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने पर उतना फोकस नहीं था. रेलवे स्टेशन आम नागरिक की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था, लेकिन रेलवे स्टेशनों पर आधुनिक सुविधाओं का अभाव था. यानी विकास का लाभ देश के हर क्षेत्र और हर नागरिक तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ था. हमने इसी को बदलने का प्रयास किया है.
Prime Minister मोदी ने कहा कि हमारे लिए विकास का मतलब है India का संतुलित विकास और गांवों के अवसर. हमारा मकसद है गरीब परिवारों को सम्मान के साथ जीवन जीने की सुविधाएं देना. हर नागरिक को निरंतर यह विश्वास देना कि विकास की इस यात्रा में वह पीछे नहीं छूटेगा. आज देश के एक्सप्रेसवे छोटे शहरों को भी जोड़ रहे हैं. एम्स जैसे संस्थानों का निर्माण छोटे शहरों में भी हुआ है. गांवों में करीब पौने दो लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोले गए हैं. आज दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है. यही गवर्नेंस का असल मकसद है, नागरिकों के जीवन को आसान बनाना और उसके सपनों को नए अवसर देना. सामान्य परिवारों को कैसे दशकों तक अभाव में रखा गया, उसका एक बड़ा उदाहरण हमारा बैंकिंग सेक्टर भी रहा है. गरीबों के नाम पर 60-70 के दशकों में बैंकों का नेशनलाइजेशन किया गया, लेकिन 2014 तक देश की आधी आबादी बैंकिंग सिस्टम से ही बाहर थी.
उन्होंने कहा कि आज India में डिजिटल बैंकिंग ने सबको 24 घंटों बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा है. लेकिन 2014 से पहले अलग ही फोन बैंकिंग का दौर था. दिल्ली में कांग्रेस के कुछ खास लोगों को और कनेक्शन वाले लोगों को फोन बैंकिंग से हजारों करोड़ रुपए का लोन दिया जाता था, लेकिन गरीब आदमी को बैंक में खाता खुलवाने के लिए गारंटर की जरूरत पड़ती थी. कांग्रेस की फोन बैंकिंग स्कीम में अमीरों के लिए हजारों करोड़ रुपए हमेशा उपलब्ध रहते थे, जिसके चलते India का बैंकिंग सिस्टम एनपीए की चपेट में आ गया. बैंकिंग सिस्टम बर्बादी के कगार पर पहुंच गया. किसी भी बदलाव के लिए सोच का भी बड़ा होना जरूरी है. नीयत साफ हो, इरादे नेक हों तो असंभव लगने वाले काम भी संभव हो जाता है. जहां नीयत में खोट हो तो संभावनाएं भी सीमित हो जाती हैं.
उन्होंने कहा कि आज India का बैंकिंग सेक्टर दुनिया के सबसे सशक्त बैंकिंग सेक्टर में से एक है. Odisha की धरती से ही देश के एक पूर्व Prime Minister ने कहा था कि दिल्ली से एक रुपया भेजते हैं तो जनता तक केवल 15 पैसे ही पहुंचते हैं. एक वो दौर था और एक आज का दौर है. आज दिल्ली से एक रुपया निकलता है तो पूरा का पूरा रुपया लाभार्थी के खाते में पहुंचता है. मुद्रा योजना से 13 करोड़ लोग पहली बार उद्यमी बने हैं. अटल पेंशन स्कीम से 9 करोड़ लोगों को सोशल सिक्योरिटी कवरेज मिला है. अकेले Odisha में ही इससे 38 लाख लोग कवर होते हैं, हमारे लिए ‘नागरिक देवो भव:’ ही सुशासन का मंत्र है.
पीएम मोदी ने कहा कि यह वही देश है, जहां डेबिट और क्रेडिट कार्ड अमीरों के लिए होते थे और अब देश के हर नागरिक के लिए सुलभ हैं. बीता दशक बैंकिंग को उन लोगों के पास पहुंचाने का था, जो उससे वंचित थे. आने वाला दशक बैंकिंग को अधिक भरोसेमंद बनाने का है. हम सभी जानते हैं कि आजकल युद्ध केवल हथियारों से नहीं लड़े जाते, किसी देश की अर्थव्यवस्था पर चोट करके भी लड़े जाते हैं, इसलिए India आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है, तो हमें अपने बैंकिंग सिस्टम को भी साइबर लुटेरों से सुरक्षित करना होगा.
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एमएस/एबीएम
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