साढ़े तीन इंच की ड्राइव में छिपी है 20 अरब की दौलत, कचड़े के पहाड़ में 8 साल से खोज रहा आईटी इंजीनियर

वाशिंगटन . साल की शुरुआत में बिटकॉइन में ऐतिहासिक तेजी देखी गई. इससे पहले इस डिजिटल करंसी को कैश कराने वाले लोग हाथ मलते रह गए. वहीं, एक वेल्श आईटी इंजीनियर जेम्स हॉवेल्स कचरे में अपनी खो चुकी हार्ड ड्राइव खोज रहे हैं, जो उन्हें 20 अरब रुपए दिला सकती है. दरअसल, इस हार्ड डाइव में एक क्रिप्टोग्राफिक प्राइवेट की’ स्टोर थी. वेल्श के पास 7,500 बिटकॉइन थे और उन्हें कैश करने के लिए यह ‘की’ बेहद अहम है.

वेल्श ने बताया कि उन्होंने गलती से 2013 में यह ड्राइव कचरे में फेंक दी थी. उसके बाद से वह न्यूपोर्ट सिटी काउंसिल से उसे ढूंढने की रिक्वेस्ट कर रहे हैं, ताकि उन्हें वह कोड मिल जाए. हालांकि, प्रशासन पर्यावरण और आर्थिक बोझ का हवाला देकर इसकी इजाजत नहीं दे रहा. इस बात की गारंटी भी नहीं है कि अब ड्राइव मिलसे वह काम आ ही जाएगी. हालांकि, बॉवेल्स ने उम्मीद नहीं छोड़ी है. उनका मानना है कि भले ही ड्राइव बाहर से डैमेज हो गई हो, डेटा रिकवरी एक्सपर्ट्स उससे डेटा निकाल सकते हैं.

हॉवेल्स ने प्रशासन को यह भी प्रस्ताव दिया है कि उन्हें ड्राइव के जरिए पैसे मिले तो वह 25 फीसदी हिस्सा शहर के कोविड-रिलीफ फंड को दे देंगे. हालांकि, अधिकारी उनकी सुनने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने कहा है कि प्रशासन ने बिना प्लान सुने ही सीधे इनकार कर दिया है. 8 जनवरी को बिटकॉइन की कीमत करीब 42 हजार डॉलर (Dollar) पहुंच गई थी. हालांकि, बाद में इसमें भारी गिरावट देखने को मिली. ऐसे में क्रिप्टोकरेंसीज को संदेह की नजर से देखने वालों का तर्क है कि बिटकॉइन कभी भी करेंसी का व्यवहारिक विकल्प नहीं बन सकती. न्यूपोर्ट सिटी काउंसिल ने भी पुष्टि की है कि हॉवेल्स ने अधिकारियों से 2013 के बाद कई बार गुजारिश की है, लेकिन उनका कहना है कि इसका पर्यावरण पर भारी नुकसान होगा. अधिकारियों का कहना है कि लैंडफिल की खुदाई, कचरा स्टोर करना और ट्रीट करना काफी महंगा पड़ सकता है. इससे आसपास के इलाके पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और इसकी गारंटी भी नहीं है कि ड्राइव मिल ही जाएगी या मिल गई तो चलने की हालत में होगी.

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