
चेन्नई, 19 अक्टूबर . तमिलनाडु भाजपा ने 1998 के कोयंबटूर सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पांच दोषियों को 60 दिन की पैरोल दिए जाने का विरोध किया है. पार्टी ने राज्य Government से यह पैरोल तत्काल रद्द करने की मांग की है.
तमिलनाडु भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने आरोप लगाया कि Government आतंकवाद से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए लोगों के प्रति नरमी बरत रही है. उन्होंने कहा कि यह फैसला विस्फोटों के पीड़ितों के साथ न्याय नहीं करता और Government के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
social media प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए तिरुपति ने कहा कि व्यक्तिगत परिस्थितियां या स्वास्थ्य कारण इतने बड़े अपराध की गंभीरता से ऊपर नहीं हो सकते. उन्होंने कहा कि इस तरह की विस्तारित पैरोल मृतकों और उनके परिवारों के साथ अन्याय है.
पैरोल पाने वाले पांच दोषियों में मोहम्मद अंसारी, मोहम्मद अली, मोनप्पा उर्फ मोहम्मद हसन, मोहम्मद अजम और नवाब खान शामिल हैं. ये सभी वर्तमान में कोयंबटूर सेंट्रल जेल में बंद हैं.
बताया गया है कि इन दोषियों ने व्यक्तिगत और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए पैरोल की मांग की थी. अधिकारियों के अनुसार, ये सभी 25 वर्ष से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं और पहले भी उन्हें पैरोल मिल चुकी है. हालांकि विधानसभा चुनावों के दौरान उनकी पैरोल अस्थायी रूप से रद्द कर दी गई थी.
14 फरवरी 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे. ये विस्फोट उस समय हुए थे, जब तत्कालीन उपPrime Minister लालकृष्ण आडवाणी की चुनावी रैली आयोजित होने वाली थी. प्रतिबंधित संगठन अल-उम्मा पर इन धमाकों को अंजाम देने का आरोप था. इस हमले में 58 लोगों की मौत हुई थी और 250 से अधिक लोग घायल हुए थे.
नारायणन तिरुपति ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी जमानत याचिका खारिज करते समय इस अपराध को “जघन्य” बताया था. उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए पैरोल आदेश तत्काल वापस लेने की मांग की.
उन्होंने कहा कि Government को निर्णय लेते समय पीड़ितों की स्मृति और जन सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए. उनका आरोप है कि इस तरह की राहत देने से यह संदेश जाता है कि समाज पर हमला करने वाले लोगों के प्रति भी नरमी बरती जा सकती है.
तिरुपति ने कहा, “कोयंबटूर विस्फोट के पीड़ितों के साथ न्याय को Political गणनाओं के लिए नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. दोषियों को अपनी पूरी सजा भुगतनी चाहिए.”
वहीं, इस फैसले का समर्थन करते हुए टीवीके विधायक वीएमएस मुस्तफा ने Chief Minister विजय का आभार जताया और पैरोल देने के फैसले का स्वागत किया.
Government के इस कदम को लेकर अब Political बहस शुरू हो गई है. भाजपा जहां पैरोल रद्द करने की मांग कर रही है, वहीं Government का कहना है कि दोषियों को याचिका में बताए गए व्यक्तिगत और चिकित्सीय आधारों पर यह राहत दी गई है.
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एएमटी/
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