18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की आज से नई दिल्ली में होगी शुरुआत, दो दिन तक चलेगा मंथन

New Delhi, 12 सितंबर . India Saturday से राजधानी दिल्ली के India मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है. यह सम्मेलन Sunday तक चलेगा, जिसमें ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के नेता, साथ ही आउटरीच आमंत्रित देश शामिल होंगे.

विदेश मंत्रालय के अनुसार, India की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम ‘लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ है. इस दौरान नेता आपसी हित के वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने के साथ-साथ साझा प्राथमिकताओं पर ब्रिक्स के भीतर सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करेंगे.

India की अध्यक्षता में इस साल India के 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्च-स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं. इसका मकसद तीन मुख्य स्तंभों (Political और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय, और सांस्कृतिक और लोगों) पर ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना था.

इन बैठकों और बिजनेस-टू-बिजनेस तथा लोगों के बीच की पहलों के जरिए India की अध्यक्षता ने व्यावहारिक और विकास-उन्मुख परिणामों के माध्यम से ब्रिक्स सहयोग को आगे बढ़ाया है.

विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, “India ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में तीन बार इसकी अध्यक्षता कर चुका है. India ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली. साल 2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी है, क्योंकि ब्रिक्स को बने हुए बीस साल पूरे हो रहे हैं.”

आधिकारिक बयान के अनुसार, India की अध्यक्षता के लिए ब्रिक्स लोगो परंपरा और आधुनिकता का संगम है. इसकी पंखुड़ियों में ब्रिक्स सदस्य देशों के जीवंत रंग झलकते हैं, जो उनकी सामूहिक शक्ति और एकता को दर्शाते हैं. बीच में “नमस्ते” की मुद्रा India की गर्मजोशी, सम्मान और सामंजस्यपूर्ण सहयोग की भावना को दर्शाती है.

ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. ब्रिक्स के साझेदार देशों में बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम के नाम शामिल हैं.

ब्रिक्स का सहयोग आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक आर्थिक स्थिति, दूरसंचार, कृषि, श्रम और रोजगार, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचा, व्यापार और विश्व व्यापार संगठन सहित कई वैश्विक मुद्दों पर लगातार बढ़ रहा है.

एएस