16 पत्थर खनन पट्टों को संचालन की मिली अनुमति · Indias News

16 पत्थर खनन पट्टों को संचालन की मिली अनुमति

सोनभद्र : लंबी कवायद के बाद जिले में पत्थर खनन के दिन बहुरने लगे हैं. धारा 20 व धारा 4 के चक्कर में बंद चल रहे एक दर्जन से अधिक पत्थर खदानों को संचालित करने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट से मिलने के बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय हो उठा है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बिल्ली-मारकुंडी स्थित खनन क्षेत्र में धारा 20 का प्रकाशन 15 जून को कर दिया गया था. जिला प्रशासन ने बिल्ली-मारकुंडी पत्थर खनन क्षेत्र में 16 खनन पट्टों को बुधवार से खनन प्रक्रिया संचालित किए जाने की स्वीकृति प्रदान कर दी.

खान अधिकारी महबूब खान ने बताया कि सदर तहसील स्थित ग्राम बिल्ली-मारकुंडी में स्वीकृत खनन पट्टा क्षेत्रों में न्यायालय के आदेश के क्रम में खनन प्रक्रिया को 29 अगस्त 2018 को प्रतिबंधित कर दिया गया था. खान ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद बिल्ली-मारकुंडी के क्षेत्रों के लिए भारतीय वन अधिनियम की धारा-20 का प्रकाशन शासन द्वारा 15 जून को कर दिये जाने व अन्य औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद कुल 16 खनन पट्टों में आठ जुलाई, 2020 से खनन प्रक्रिया संचालित किए जाने का आदेश दिया है. यह है धारा-4 और धारा- 20

भारतीय वन अधिनियम की धारा-4 के तहत सरकार किसी भूमि को वन क्षेत्र में शामिल किए जाने का इरादा जाहिर करती है. वहीं, अधिनियम की धारा-20 के तहत वो भूमि अंतिम तौर पर वन क्षेत्र घोषित कर दी जाती है. धारा 20 का प्रकाशन भी देगा जीवनदान

धारा-20 के प्रकाशन को लेकर फिलहाल सकारात्मक स्थिति बनी है. इसके प्रकाशन से बिल्ली-मारकुंडी की दर्जनों नयी खदानें चालू हो जायेंगी. वहीं इसके प्रकाशन नहीं होने से पिछले दो वर्षों के दौरान खनन बंदी से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर एक लाख रोजगार प्रभावित हुआ था. बिल्ली-मारकुंडी में कभी 150 से ज्यादा खदानें एवं 300 से ज्यादा क्रशर प्लांट थे. लेकिन वर्तमान में मात्र एक दर्जन खदानें और दो दर्जन के करीब क्रशर प्लांट चल रहे हैं. धारा 20 के प्रकाशन नहीं होने से बिल्ली-मारकुंडी में डोलो स्टोन व लाइम स्टोन के 80 खनन पट्टे, बर्दिया और सिदुरिया की 15 तथा कोटा, रेड़ीया, गुरूदह, ससनई, करगरा, मीतापुर, बड़गवा एवं पटवध की 15 बालू खदानें बंद चल रही हैं. इसके अलावा सलखन, बहुआर, दुगौलिया, हिनौती एवं जुलाली में सैंड स्टोन की खदानों को भी इको सेंसटिव जोन के तहत कैमूर वन्यजीव प्रभाग में होने पर बंद कर दिया गया है. पत्थर वाली कुल 118 खदानों में 50 के करीब खदानों की लीज अवधि भी अब पूरी हो चुकी है. यही नहीं ई-टेंडरिग के तहत पिछले वर्ष चालू हुयी पत्थर और बालू की खदानें भी धारा 20 के प्रकाशन नहीं होने के कारण बंद हैं.

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