12वें ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन में भाग लेने के बाद लौटा ईरानी प्रतिनिधिमंडल

New Delhi, 28 अक्टूबर . दो दिवसीय 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में भाग लेने के बाद ईरान से आया प्रतिनिधिमंडल स्वदेश रवाना हो गया. Lok Sabha सदस्य प्रवीण खंडेलवाल ने उनसे विदाई मुलाकात की.

social media प्लेटफॉर्म एक्स पर India स्थित ईरानी दूतावास ने Wednesday को इसकी जानकारी दी. कुछ तस्वीरों को पोस्ट करते हुए बताया, “India आए इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने आज सुबह New Delhi से तेहरान के लिए प्रस्थान किया. Lok Sabha सदस्य प्रवीण खंडेलवाल प्रतिनिधिमंडल को विदा करने के लिए वहां मौजूद थे.”

ईरान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरान की इस्लामिक कंसल्टेटिव असेंबली के प्रेसिडियम सदस्य डॉ. अहमद नादेरी ने किया था.

इस प्रतिनिधिमंडल में उनके साथ मुख्य रूप से अब्बास मोग्तदाई खौरसगानी (भारत-ईरान संसदीय मैत्री समूह के प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष) और अली हदादी (भारत-ईरान संसदीय मैत्री समूह के प्रथम उपाध्यक्ष और उद्योग एवं खान समिति के प्रमुख) शामिल थे.

पहले इसका हिस्सा ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ बनने वाले थे लेकिन फिर दूतावास ने Saturday (24 अक्टूबर) को बयान जारी कर बताया , “अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण वो नहीं आ पाएंगे. उनके बदले ईरान का एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल मंच की बैठक में हिस्सा लेगा.”

India की अध्यक्षता में 12वें ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रीय राजधानी New Delhi स्थित संसद भवन परिसर के संविधान सदन में किया गया था. India की अध्यक्षता में आयोजित 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच संयुक्त घोषणा-पत्र अंगीकृत किए जाने के साथ संपन्न हुआ. दो दिवसीय सम्मेलन में वैश्विक शासन व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की भागीदारी बढ़ाने, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार, आतंकवाद पर सख्त रुख, डिजिटल तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल और सतत विकास जैसे अहम मुद्दों पर साझा प्रतिबद्धता सामने आई.

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने समापन सत्र में कहा, “वैश्विक चुनौतियों का स्थायी समाधान युद्ध और संघर्ष में नहीं, बल्कि संवाद, शांति और सहयोग में निहित है. दुनिया इस समय क्षेत्रीय संघर्षों, आर्थिक अनिश्चितता, व्यापारिक तनाव, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है. इनका प्रभाव किसी एक देश तक सीमित नहीं रहता, इसलिए संवाद, कूटनीति और आपसी सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं.” सम्मेलन के समापन पर उन्होंने वर्ष 2027 के लिए ब्रिक्स संसदीय मंच की अध्यक्षता चीन को सौंप दी.

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केआर/