100 साल पुराने दिमाग के रेखा-चित्र आज भी पढ़ते हैं मेडिकल छात्र

100 साल पुराने दिमाग के रेखा-चित्र आज भी पढ़ते हैं मेडिकल छात्र

अगर आप न्यूरोसाइंटिस्ट या मेडिकल के छात्र हैं, तो निश्चित ही आपने सेन्टिएगो रमॉन (1852-1934) का नाम सुना होगा. वे स्पेन के मशहूर न्यूरोसाइंटिस्ट थे, उन्होंने मानव शरीर के नर्व सिस्टम को बहुत बारीकी से समझा और उन पर अध्ययन किया था. सेन्टिएगो रमॉन ने इंसानी दिमाग की संरचना समझने के लिए वहां के नर्व सिस्टम, रक्त कोशिकाओं और उत्तकों को समझने के लिए 1904 में स्याही और पेन्सिल से रेखा चित्र बनाए थे. कई बार विफल रहने के बाद वे उस पर कामयाब हुए थे. वे रेखाचित्र आज भी कई देशों के मेडिकल छात्रों के पाठ्यक्रम में शामिल हैं. सेन्टिएगो रमॉन का जन्म एक मई को हुआ था, इसीलिए बोस्टन स्थित एमआईटी म्यूज़ियम में उनकी प्रदर्शनी लगाई गई है. रेन्टिएगो रमॉन ने ही सबसे पहले दिमाग की अलग कोशिकाओं की पहचान की थी, जिन्हें न्यूरॉन कहा गया. बाद में रमॉन की थ्योरी ‘न्यूरॉन डॉक्टरिन’ आई. इसके लिए 1906 में उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला था. 1940 में इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप आने के बाद अंतिम रूप से रमॉन की थ्योरी की पुष्टि की गई थी.

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