1.5 अरब आबादी, मजबूत खपत और निवेश क्षमता भारत की सबसे बड़ी ताकत; आईएमएफ अनुमान से बढ़ा वैश्विक भरोसा: विशेषज्ञ

New Delhi, 13 अक्तूबर . अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा India के 7 प्रतिशत की विकास दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने के अनुमान को अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों ने Tuesday को India की आर्थिक क्षमता पर वैश्विक भरोसे का संकेत बताया है.

अर्थशास्त्री विजय सरदाना ने न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा कि India जैसा 1.5 अरब से अधिक आबादी वाला देश अपार संभावनाओं से भरा हुआ है और मौजूदा जीडीपी आंकड़े यह साबित करते हैं कि देश में विकास की गुंजाइश अभी भी बहुत व्यापक है.

उन्होंने कहा, “दुनिया को India के बाजार को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि यहां निवेश और कारोबार के विशाल अवसर मौजूद हैं.” उन्होंने कहा कि वैश्विक Political और आर्थिक पुनर्संतुलन (रियलाइनमेंट) के दौर में India एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.”

उन्होंने आगे कहा, “India की सबसे बड़ी ताकत उसकी मजबूत उपभोग (कंजम्प्शन) आधारित अर्थव्यवस्था है. जब 1.5 अरब लोग रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च करते हैं, तो उससे कृषि, उद्योग, सेवाओं और तकनीक जैसे सभी क्षेत्रों को बल मिलता है.”

उन्होंने यह भी कहा कि आईएमएफ का अनुमान लोगों में विश्वास पैदा करता है, खासकर ऐसे समय में जब महंगाई और वैश्विक आर्थिक सुस्ती को लेकर चिंताएं रही हैं. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि केवल जीडीपी वृद्धि दर से आम आदमी का जीवन नहीं बदलता. जमीनी स्तर पर बदलाव के लिए रोजगार सृजन, निवेश आकर्षित करने वाली नीतियां और आर्थिक अवसरों का विस्तार जरूरी है.

उनके मुताबिक जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय संकेतक जरूर हैं, लेकिन वास्तविक प्रगति का आकलन रोजगार और लोगों की आय में सुधार से होना चाहिए.

वहीं, कपूर एंड एसोसिएट्स के अर्थशास्त्री और कर विशेषज्ञ सीए योगेंद्र कपूर ने से कहा कि India के पास 7 प्रतिशत या उससे अधिक की विकास दर बनाए रखने की क्षमता है. उन्होंने कहा कि Government का डिजिटलीकरण, बुनियादी ढांचे के विकास और पारदर्शी आर्थिक व्यवस्था पर फोकस निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है.

उन्होंने आगे कहा, “आयकर और GST संग्रह में लगातार बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से अनौपचारिक ढांचे से औपचारिक अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है. इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हुआ है.”

हालांकि उन्होंने आगाह किया कि लगातार ऊंची मुद्रास्फीति India की विकास यात्रा के लिए एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है. उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, इसलिए महंगाई को नियंत्रण में रखना आवश्यक होगा.

इसके अलावा, बाजार विशेषज्ञ एपी शुक्ला ने न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि 2014 के बाद India ने रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं जैसी कई चुनौतियों के बावजूद अपनी विकास गति बनाए रखी है.

उन्होंने कहा, “जब से मोदी Government आई है पावर में, 2014 से अभी तक, बहुत सारी ग्लोबल चुनौतियां आई हैं लेकिन उसके बावजूद हमारा ग्रोथ रेट कम नहीं हुआ है. हम बढ़ते जा रहे हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि Government की नीतियों, बेहतर कारोबारी माहौल और बढ़ते निजी निवेश ने अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है. शुक्ला ने कहा कि India की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा जनसांख्यिकीय आधार है, जो दुनिया भर के निवेशकों को आकर्षित कर रहा है.

वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के India की आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत रहने के अनुमान को लेकर इकोनॉमी एक्सपर्ट विनोद रावल ने इसे देश के लिए गर्व की बात बताया है. उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती की ओर बढ़ रही है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में India की स्थिति मजबूत बनी हुई है.

विनोद रावल ने से बात करते हुए कहा कि Government की ओर से 12 लाख रुपए तक की आय पर आयकर में राहत देने के फैसले से लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ने में मदद मिल सकती है. इसका सकारात्मक असर अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है. उन्होंने कहा कि देश में सेमीकंडक्टर सेक्टर भी तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसका लाभ आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है.

उन्होंने पेट्रोल की कीमतों को लेकर भी उम्मीद जताई कि अक्टूबर की शुरुआत से पहले के स्तर पर कीमतें वापस आ सकती हैं. हालांकि, पेट्रोल की कीमतों में बदलाव को लेकर आधिकारिक पुष्टि जरूरी है.

रावल ने आगे कहा कि घरेलू मांग, सरकारी नीतियों और नए तकनीकी क्षेत्रों में हो रहे विकास से भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है.

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डीबीपी