1 नवंबर से लागू होगा जीएसटी सुधारों का पहला चरण, छोटे निर्यातकों और उद्योगों को मिलेगी राहत

New Delhi, 27 अक्टूबर . केंद्र Government ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था में किए गए सुधारों के पहले चरण को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है. केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा 26 अक्टूबर को जारी अधिसूचनाओं के अनुसार, बिक्री के बाद दिए जाने वाले डिस्काउंट, रिफंड प्रक्रिया को तेज करने और निर्यातकों को राहत देने से जुड़े नए प्रावधान 1 नवंबर 2026 से प्रभावी हो जाएंगे.

इन बदलावों के तहत वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के लिए डिस्काउंट प्रबंधन को आसान बनाया गया है. नए नियमों और क्रेडिट नोट प्रावधानों के लागू होने से कारोबारियों को कर अनुपालन में अधिक स्पष्टता और सुविधा मिलेगी.

Government ने उन उद्योगों को भी बड़ी राहत दी है जो इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर का सामना कर रहे हैं, यानी जहां कच्चे माल पर लगने वाला GST अंतिम उत्पाद पर लगने वाले GST से अधिक होता है. ऐसे व्यवसाय अब जोखिम मूल्यांकन की शर्तों के अधीन अपने पात्र रिफंड का 90 प्रतिशत तक अग्रिम (प्रोविजनल) रिफंड प्राप्त कर सकेंगे. इससे उनकी कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) पर दबाव कम होने की उम्मीद है.

छोटे निर्यातकों के लिए भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है. Government ने टैक्स भुगतान वाले निर्यात रिफंड के लिए पहले लागू 1,000 रुपए की न्यूनतम सीमा समाप्त कर दी है. इससे डाक और कूरियर के माध्यम से छोटे स्तर पर निर्यात करने वाले निर्यातकों को भी बिना किसी न्यूनतम सीमा के रिफंड का लाभ मिल सकेगा.

एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव इंटरमीडियरी सेवाओं से संबंधित है. नए नियमों के तहत ऐसी सेवाओं के लिए “प्लेस ऑफ सप्लाई” अब सेवा प्रदाता या मध्यस्थ के स्थान के बजाय सेवा प्राप्त करने वाले व्यक्ति के स्थान को माना जाएगा. इससे भारतीय सेवा निर्यातकों को कर संबंधी स्पष्टता मिलेगी और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिल सकता है.

हालांकि व्यापक संरचनात्मक और कानूनी बदलावों का अगला चरण 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए केंद्रीय और राज्य GST कानूनों में संशोधन की आवश्यकता होगी.

ये फैसले 8 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित 57वीं GST परिषद बैठक में लिए गए थे. बैठक का मुख्य उद्देश्य करदाताओं पर अनुपालन बोझ कम करना, इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के प्रवाह को सुचारु बनाना और रिफंड प्रक्रिया को तेज करना था.

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, GST सुधारों का कार्यान्वयन आवश्यक तकनीकी और सिस्टम अपग्रेडेशन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. 1 नवंबर के बाद जहां भी तकनीकी रूप से संभव होगा, वहां रिफंड की स्वीकृति प्रक्रिया को स्वचालित (ऑटोमेटेड) किया जाएगा. हालांकि यह सुविधा केवल नए रिफंड आवेदनों पर लागू होगी और पहले से लंबित मामलों पर नहीं.

Government ने यह भी स्पष्ट किया है कि GST कानूनों में संशोधन से जुड़े बड़े बदलाव, जैसे गिरफ्तारी प्रावधानों में संशोधन, अभियोजन सीमा का युक्तिकरण, ई-वे बिल नियमों में बदलाव और कारण बताओ नोटिस जारी करने के लिए 10,000 रुपए की न्यूनतम सीमा तय करना, 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे.

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए प्रावधानों का प्रभाव पहले से हुई गिरफ्तारियों पर नहीं पड़ेगा. परिषद ने कुछ गिरफ्तारी संबंधी प्रावधानों को कानून से हटाने का निर्णय लिया है, लेकिन यह बदलाव केवल निर्धारित तिथि से आगे के मामलों पर लागू होगा. Government फिलहाल अंतरिम दिशा-निर्देशों पर भी विचार कर रही है, हालांकि इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.

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डीबीपी