हैदराबाद में रिटायर्ड आईपीएस की पत्नी हत्याकांड का खुलासा, नेपाली गैंग के 4 सदस्य गिरफ्तार

हैदराबाद, 26 अक्टूबर . हैदराबाद में अपने घर पर सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी रे विनय रंजन की पत्नी तनुजा रंजन की बेरहमी से हत्या किए जाने के पांच महीने से अधिक समय बाद Police ने Monday को चार नेपालियों को गिरफ्तार किया.

गिरफ्तार किए गए लोगों में घरेलू सहायिका धर्मा तिरुवा उर्फ ​​कल्पना भी शामिल है, जो पीड़िता के घर पर काम करती थीं. यह गिरफ्तारियां पांच महीने तक चली उस जांच के बाद की गईं, जो कई राज्यों और भारत-नेपाल सीमा तक फैली हुई थीं.

हैदराबाद Police कमिश्नर सज्जनार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन गिरफ्तारियों की जानकारी दी. तीन Police कमिश्नरेट क्षेत्रों में नेपाली गिरोहों द्वारा संपत्ति से जुड़े अपराधों में हो रही बढ़ोतरी की जांच कर रही एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने Monday को नामपल्ली रेलवे स्टेशन के पास चार आरोपियों को गिरफ्तार किया.

26 वर्षीय धर्मा उर्फ ​​कल्पना नेपाल के सुर्खेत जिले की रहने वाली हैं. 31 वर्षीय गणेश बीके उर्फ ​​गणेश विश्वकर्मा उर्फ ​​दिनेश थापा एक मजदूर है, जो पुणे में रहता था. 44 वर्षीय चंद्र बहादुर तमांग उर्फ ​​रंजीत थापा उर्फ ​​शंकर चंद्र लामा उर्फ ​​कांचा एक रसोइया है, जिसका भारतीय पता Haryana के गुरुग्राम में दर्ज है. वहीं, 37 वर्षीय गणेश बहादुर शाही एक चौकीदार है, जो पुणे में रहता था.

Police ने बताया कि दो अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं और उन्हें पकड़ने के लिए टीमें लगातार कोशिश कर रही हैं. इससे पहले भी Police इस मामले में दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है.

Police के अनुसार, आरोपी 7-8 मई की रात को प्रशासन नगर स्थित घर में घुसे, तनुजा रंजन को काबू किया और उनका दम घोंट दिया. वे कथित तौर पर 225 ग्राम सोने के गहने और अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए.

Police जांच से पता चला है कि धर्मा जून 2025 में एक रिश्तेदार के जरिए हैदराबाद आई थी और जुबली हिल्स स्थित घर में लगभग 20,000 रुपए प्रति माह के वेतन पर घरेलू सहायिका के रूप में काम करने लगी थी. काम के दौरान, वह कथित तौर पर पुणे में रहने वाले नेपाली नागरिक विकास के संपर्क में थी. विकास उससे बार-बार उसके मालिक, घर की संपत्ति और घर के अंदर मौजूद कीमती सामान के बारे में पूछता रहता था. आखिरकार, उसने लूट करने का प्रस्ताव रखा और बदले में लूट की रकम में से हिस्सा देने का वादा किया.

अप्रैल 2026 में धर्मा अपने बीमार पिता से मिलने पुणे गई, जहां वह इस कथित गिरोह के अन्य सदस्यों के संपर्क में आई. 4 मई को जब उसका मालिक Bengaluru के लिए निकला तो उसने कथित तौर पर अपने साथियों को इसकी सूचना दे दी. Police के अनुसार, 4 मई को गणेश बहादुर शाही, शंकर चंद्र लामा और सुनील परियार Maharashtra के रायगढ़ जिले के कलंबोली में मिले और एक किराए की मारुति अर्टिगा से पुणे गए. अगले दिन, हैदराबाद के लिए रवाना होने से पहले, वे अपने अन्य साथियों से मिले, जिनमें गणेश बीके भी शामिल था.

7 मई की सुबह, गणेश बीके और सुरेश शाही कथित तौर पर धर्मा से उसके काम की जगह के पास मिले. उन्होंने वहां का मुआयना किया और चर्चा की कि वे घर के अंदर कैसे दाखिल हो सकते हैं. कथित तौर पर, इस वारदात को दो समूहों ने मिलकर अंजाम दिया.

Police के मुताबिक, 7 मई की शाम को यह गिरोह महात्मा गांधी बस स्टेशन के पास रवींद्र बार में इकट्ठा हुआ. सुजन शाही, जिसे सुरेश शाही के नाम से भी जाना जाता है, की बनाई योजना के तहत, वे दो समूहों में बंट गए. एक समूह में गणेश बीके, सुरेश शाही और शंकर लामा थे, जिनका काम घर के अंदर घुसकर लूटपाट करना था. दूसरे समूह में गणेश बहादुर शाही, सुनील परियार और नेत्र शाही शामिल थे, जो कथित तौर पर नामपल्ली रेलवे स्टेशन के पास निगरानी टीम के रूप में मौजूद रहे.

7 और 8 मई की दरमियानी रात को धर्मा ने कथित तौर पर दरवाजा खोला, ताकि बाकी लोग अंदर आ सकें. Police ने बताया कि इस घटना के दौरान तनुजा जाग गई थी. हमलावरों ने कथित तौर पर उसका मुंह बंद कर दिया और उसे काबू कर लिया, जिससे दम घुटने से उसकी मौत हो गई. इसके बाद गिरोह ने पूरे घर की तलाशी ली, अलमारियां तोड़ीं और सोने के गहने व अन्य कीमती सामान लूट लिया.

घर के पिछले दरवाजे से निकलने के बाद, आरोपी कथित तौर पर नामपल्ली पहुंचे और वहां अपनी निगरानी टीम के साथ मिल गए.

जांच से पता चला कि इसके बाद यह गिरोह काजीपेट की ओर गया, सुनसान पहाड़ी इलाकों में पहुंचा और लूटे गए सामान को नौ बराबर हिस्सों में बांट लिया. फिर वे छोटे-छोटे समूहों में बंट गए, नेपाल की ओर भाग गए और अलग-अलग जगहों पर कीमती सामान ठिकाने लगा दिया.

22 मई को, टास्क फोर्स की टीमों ने सुनील बहादुर औजी उर्फ सुनील परियार और लूटे गए सामान को लेने वाले दिलीप बहादुर मिजार उर्फ सोनार को गिरफ्तार कर लिया.

Police ने उनके पास से लूटे गए सामान में 26 ग्राम सोना/सामान बरामद किया. जांच Bengaluru, Mumbai , पुणे, सूरत, Patna, दिल्ली, Lucknow और उत्तराखंड तक जारी रही. एसआईटी ने भारत-नेपाल सीमा के पास भी जमीनी स्तर पर पूछताछ की और दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों में पांच महीने से अधिक समय तक खुफिया जानकारी जुटाई.

Police ने बताया कि स्थानीय मुखबिरों ने संदिग्धों के संभावित ठिकानों, उनके यात्रा मार्गों, काम-काज और संपर्कों का पता लगाने में टीम की मदद की.

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डीके/डीकेपी