हुगली में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन शुरू, शाम तक 700 से अधिक मूर्तियां हुईं प्रवाहित

कोलकाता, 21 अक्टूबर . कोलकाता और हावड़ा में हुगली नदी के विभिन्न घाटों पर Wednesday से दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू हो गया. अधिकारियों ने बताया कि विसर्जन जुलूसों में ‘आबार एशो मां’ (मां, अगले साल फिर जल्दी आना) के जयघोष गूंजते रहे.

विसर्जन प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. Wednesday शाम 7 बजे तक कोलकाता और हावड़ा के विभिन्न घाटों से 700 से अधिक दुर्गा प्रतिमाओं का हुगली नदी में विसर्जन किया जा चुका था.

कोलकाता Police ने विसर्जन को लेकर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए हैं. Police अधिकारी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रतिमा विसर्जन के लिए आने वाले पूजा आयोजकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.

कोलकाता Police के पोर्ट डिवीजन के डिप्टी कमिश्नर हरिकृष्ण पाई सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. उनके साथ आईपीएस अधिकारी आकाश मेघारिया और कई अन्य वरिष्ठ Police अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं.

Police ने हुगली नदी के पानी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

वहीं, कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने विसर्जन के बाद प्रतिमाओं को हटाने के लिए विशेष व्यवस्था की है. यह सेवा 21 से 24 अक्टूबर तक 24 घंटे उपलब्ध रहेगी.

नदी किनारे कुल 27 घाटों पर प्रतिमा हटाने और सफाई की व्यवस्था की गई है. इसके लिए नगर निगम के विभिन्न विभागों के 611 कर्मचारी तैनात किए गए हैं.

इन घाटों में बाजे कदमतला घाट, जजेस घाट, दोई घाट, निमतला घाट, आहिरीटोला घाट, बिचाली घाट, शोभाबाजार घाट, रतन बाबू घाट, सर्वमंगला घाट और कुमारटुली घाट समेत अन्य प्रमुख घाट शामिल हैं.

जनसुरक्षा के लिए केएमसी की 43 मेडिकल टीमें 24 घंटे तैनात रहेंगी. आपात स्थिति से निपटने के लिए 7 एम्बुलेंस भी उपलब्ध रखी गई हैं.

इसके अलावा, घाटों की निगरानी के लिए 8 वेक्टर कंट्रोल टीमें तैनात की गई हैं. जलमार्ग में सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की 8 टीमें रतन बाबू घाट से बिचाली घाट तक तैनात रहेंगी.

प्रत्येक एनडीआरएफ टीम में 35 कर्मी होंगे. साथ ही 56 सिविल डिफेंस स्वयंसेवक भी तैनात किए गए हैं. इनके पास मोटर बोट, लाइफ जैकेट और गोताखोरों की सुविधा उपलब्ध रहेगी.

आम लोगों की सुविधा के लिए 28 पानी के टैंकर और 12 बायो-टॉयलेट की व्यवस्था की गई है. सभी घाटों पर पर्याप्त रोशनी, दिशा-निर्देश और जनजागरूकता के लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम भी लगाया गया है.

सफाई और विसर्जन प्रबंधन को सुचारू बनाए रखने के लिए केएमसी के पार्क्स एंड स्क्वेयर्स, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, लाइटिंग, सिविल और स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ कोलकाता Police, सिंचाई विभाग, आपदा प्रबंधन एवं सिविल डिफेंस विभाग, एनडीआरएफ और श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट प्राधिकरण के बीच समन्वय स्थापित किया गया है.

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एएमटी/डीकेपी