
शिमला, 9 अक्टूबर . केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने Friday को Himachal Pradesh में चल रही प्रमुख बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाओं की समीक्षा की. इनमें 55,103 करोड़ रुपए की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं और 15,624 करोड़ रुपए की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना प्रमुख रूप से शामिल रहीं. हाल ही में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिलने के बाद किशाऊ परियोजना को नई गति मिली है.
बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग, ग्रामीण सड़कें, रेलवे संपर्क, स्वास्थ्य ढांचा, जलविद्युत परियोजनाएं, जल संसाधन और औद्योगिक विकास से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की गई. इस दौरान परियोजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन, लंबित मुद्दों के समाधान और स्वीकृत धनराशि का लोगों तक वास्तविक लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया.
Union Minister जेपी नड्डा ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र Government Himachal Pradesh में बेहतर संपर्क व्यवस्था, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और आर्थिक अवसरों के सृजन के लिए लगातार निवेश और सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है.
उन्होंने कहा कि राज्य Government को स्वीकृत धनराशि का प्रभावी उपयोग, समय पर प्रशासनिक फैसले और नियमित निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि जनहित की परियोजनाओं में अनावश्यक देरी न हो.
पहाड़ी राज्य में बुनियादी ढांचे के महत्व को रेखांकित करते हुए नड्डा ने कहा कि सड़क और रेल संपर्क केवल आवागमन के लिए ही नहीं, बल्कि मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने, किसानों और बागवानों को बाजार उपलब्ध कराने, पर्यटन और रोजगार बढ़ाने तथा प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में सुरक्षा, निर्माण की गुणवत्ता और समयसीमा का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.
समीक्षा बैठक में 15,624 करोड़ रुपए की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना विशेष चर्चा का विषय रही. सितंबर में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किए जाने के बाद इसके कार्यान्वयन को नई गति मिली है.
15 सितंबर को Himachal Pradesh, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, Haryana, Rajasthan और दिल्ली के बीच हुए समझौते ने लंबे समय से लंबित इस परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया है.
Himachal Pradesh और उत्तराखंड की सीमा पर टोंस नदी पर बनने वाली यह परियोजना जल भंडारण, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन को बढ़ावा देगी.
राष्ट्रीय परियोजना के तहत केंद्र Government इसकी लगभग 90 प्रतिशत लागत वहन करेगी, जबकि शेष खर्च भागीदार राज्यों द्वारा साझा किया जाएगा.
परियोजना पूरी होने पर लगभग 97,000 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने और करीब 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन होने का अनुमान है.
समीक्षा के दौरान अन्य प्रमुख जल संसाधन और ऊर्जा परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई. इनमें लगभग 7,000 करोड़ रुपए की रेणुकाजी बांध परियोजना और 1,800 करोड़ रुपए की लुहरी चरण-1 जलविद्युत परियोजना शामिल हैं.
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एएमटी/डीकेपी
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