
New Delhi, 4 अक्टूबर . आधुनिक हिन्दी साहित्य के महान साहित्यकार, समीक्षक और निबंधकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जयंती पर देशभर के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी.
अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के उपGovernor दिनेश शर्मा ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आधुनिक हिंदी के महान साहित्यकार, समीक्षक आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन.”
उत्तर प्रदेश के उपChief Minister केशव प्रसाद मौर्य ने भी आचार्य शुक्ल को याद किया. उन्होंने लिखा, “हिन्दी साहित्य के महान आलोचक एवं साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन! उन्होंने अपनी गहन साहित्यिक दृष्टि, आलोचनात्मक चिंतन और प्रभावशाली लेखनी से हिन्दी साहित्य को नई दिशा प्रदान की. उनका अमूल्य योगदान हिंदी जगत में सदैव स्मरणीय रहेगा.”
बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अपने संदेश में कहा, “महान समीक्षक, लेखक एवं प्रख्यात साहित्यकार आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन. हिंदी साहित्य के विकास में उनके अतुलनीय योगदान और उनकी समृद्ध साहित्यिक विरासत को सदैव स्मरण किया जाता रहेगा.”
Madhya Pradesh भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने लिखा, “हिन्दी साहित्य के समृद्ध विकास में अतुलनीय योगदान देने वाले महान साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जयंती पर उन्हें सादर नमन करता हूं. साहित्य के प्रति उनका गहन चिंतन एवं उनकी कालजयी कृतियां आने वाली पीढ़ियों को सदैव मार्गदर्शन देती रहेंगी.”
भाजपा नेता बजरंग बहादुर सिंह ने आचार्य शुक्ल को युगद्रष्टा बताते हुए लिखा, “हिन्दी साहित्य के युगद्रष्टा आलोचक एवं महान साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन! अपनी अद्वितीय साहित्यिक दृष्टि, गहन चिंतन और सशक्त लेखनी के माध्यम से उन्होंने हिन्दी साहित्य को समृद्ध करते हुए उसे नई दिशा प्रदान की.”
वहीं भाजपा नेता आशुतोष त्रिपाठी ने कहा, “हिंदी साहित्य के महान साहित्यकार एवं मूर्धन्य समीक्षक, आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन. हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में उनके अतुलनीय योगदान को सदैव स्मरण किया जाता रहेगा. उनकी साहित्यिक दृष्टि और विचारधारा आज भी साहित्य जगत को मार्गदर्शन प्रदान करती है.”
बता दें कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जन्म 4 अक्टूबर 1884 को हुआ था. वे हिन्दी साहित्य के इतिहास-लेखन और आलोचना के क्षेत्र में मील का पत्थर माने जाते हैं. उनकी प्रसिद्ध कृति ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ आज भी साहित्य के विद्यार्थियों के लिए आधार ग्रंथ है.
–
एससीएच/एएस
Skip to content