हिंदी दिवस विशेषः रील क्रांति ने दिया हिंदी को नया आयाम, ‘शुद्ध हिंदी’ एक कल्पना- विजयश्री तनवीर

New Delhi, 15 सितंबर . हिंदी साहित्य की एक चर्चित युवा लेखिका और कहानीकार विजयश्री तनवीर ने हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी के नए दौर को लेकर से बातचीत करते हुए अपनी राय दी.

हिंदी के नए दौर पर विजयश्री तनवीर ने कहा, “हिंदी की जो समृद्धता थी, उससे हम बाहर आए हैं. हम हिंदी के दौर में हैं, यह बहुत अच्छी चीज है. वर्ना, हमने अपने बच्चों को अंग्रेजी को तरफ ढकेला. ऐसे में हम कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि बच्चे हिंदी भाषी बनेंगे. 90 के दशक में हमें हिंदी पढ़ते-लिखते समय हीनता महसूस होती है, लेकिन आज के बच्चों में यह बात नहीं है. आज बच्चे हिंदी में लिख रहे हैं और किताबें पढ़ रहे हैं. यह संभव हो सका, नए तरीके से हिंदी लिखने वाले लेखकों की वजह से, जिन्होंने नई पीढ़ी को अपनी तरफ खींचा, भले ही उन पर हिंदी का स्वरूप बिगाड़ने का आरोप लग रहा हो. इससे बच्चे हिंदी का ककहरा सीख रहे हैं.”

जेन-जी, जैन-अल्फा, जैसे नए अन्य भाषी शब्द के जन्म पर विजयश्री तनवीर ने कहा, “अंग्रेजी के मुकाबले हिंदी का ककहरा बड़ा है. अंग्रेजी में पूर्ण शब्द हैं, जबकि हिंदी में मात्राएं, आधे और बिंदी है. यह अंतर जेनजी और जेन अल्फा के लिए मुश्किल हो जाता है. ऐसे में युवा पीढ़ी ने सरल भाषा के तौर पर अंग्रेजी चुनी. वर्तमान में माता-पिता अपने बच्चों को अंग्रेजी में परिवार में देने की कोशिश करते हैं. ऐसे में स्कूलों में हिंदी को कमतर आंका जा रहा है. हिंदी अध्यापक भी हिंग्लिश में पढ़ा रहे रहैं. ऐसे में नई पीढ़ी में हिंग्लिश का चलन बढ़ा है. जेन-जी और जेन अल्फा हिंदी भी हिंग्लिश की तरह पढ़ते हैं.”

उच्च पदों, न्यायपालिका और तकनीकी क्षेत्रों में अंग्रेजी के वर्चस्व पर विजयश्री तनवीर ने कहा, “यह बात तो सही है कि अंग्रेजी बोलने वाले सभ्य माने जाते हैं. उच्च पदों पर आसीन अधिकारियों के बीच अंग्रेजी का वर्चस्व रहा. हालांकि, प्रवेश परीक्षाओं में मुख्य रूप से हिंदी हावी रही. हिंदी भाषियों को हिंदी को बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए. सरकारी कामकाजों में भी हिंदी का चलन बढ़ना चाहिए.”

लेखिका विजयश्री ने कहा, “social media और रील क्रांति ने हिंदी को नया आयम दिया है. हिंदी गानों पर रील बनाने का क्रेज बढ़ा है. आजकल हमारे नेता हिंदी में लोगों को संबोधित कर रहे हैं. इसका साफ संदेश है कि अपनी भाषा में बात करो और अपने विचार सबके सामने रखो. यह एक सकारात्मक शुरुआत है, इस तरह सभी को हिंदी भाषा के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी.”

हिंदी के विरोध पर विजयश्री ने कहा, “India में हिंदी का कभी विरोध नहीं हुआ. हिंदी को जबरन थोपने पर विरोध हुआ. India बहुभाषी देश है. संविधान ने 22 से अधिक भाषाओं को मान्यता दी है. हिंदी राष्ट्र भाषा नहीं है. अंग्रेजी और हिंदी राज भाषाएं हैं, यानी कि सरकारी कामकाज में इन दोनों भाषाओं का प्रयोग हो. India के अन्य राज्यों में बोले जाने वाली भाषाएं भी प्राचीन हैं, ऐसे में हिंदी को प्राथमिकता देकर अन्य भाषाओं को गौण नहीं बनाना चाहिए. सभी को अपनी भाषा में बोलने और लिखने का स्वतंत्र अधिकार होना चाहिए.”

हिंदी भाषा के लोकतांत्रिक बनाने में social media की भूमिका पर विजयश्री ने कहा, “social media हिंदी के प्रचार-प्रसार में बहुत अहम भूमिका निभा रहा है. हिंदी का सरलीकरण हुआ है और भाषा बदली है. रील ने क्रांति की है. नई हिंदी या हिंग्लिश लोगों को आकर्षित किया है.”

‘शुद्ध हिंदी’ को लेकर विजयश्री तनवीर ने कहा, “शुद्ध हिंदी एक कल्पना है. आज के दौर में शुद्ध हिंदी इतनी असंगत है कि इस भाषा में कभी बात नहीं कर सकते हैं. आमजन की जो भाषा है, वही संगत है. हिंदी ने दूसरी भाषाओं से हमेशा शब्द लिए हैं, यह हीनता नहीं, उदारता है. सही व्याकरण के साथ बोली जाने वाली भाषा को ही समाज मान्यता देगा. हिंदी के व्याकरण में बदलाव आया है और आना भी चाहिए, क्योंकि भाषा का स्वरूप जल की तरह है, जो हमेशा बदलती रहती है. समाज में जैसे-जैसे बदलाव होगा, वैसे-वैसे भाषा भी बदलेगी. हिंदी एक महान भाषा है.”

ओपी/एएस