हरमनप्रीत कौर की सबसे बड़ी विरासत वनडे विश्व कप 2025 का खिताब है: अंजुम चोपड़ा

New Delhi, 9 अक्टूबर . भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान अंजुम चोपड़ा का मानना है कि हाल ही में कप्तानी छोड़ने वाली हरमनप्रीत कौर की सबसे बड़ी विरासत घरेलू धरती पर वनडे विश्व कप 2025 जीतना होगा. चोपड़ा ने कहा कि कौर टीम को जिस टीम से मिली थीं, उससे कहीं ज्यादा मजबूत, अनुभवी और आत्मविश्वासी टीम के तौर पर छोड़कर गई हैं.

अंजुम चोपड़ा ने से बात करते हुए कहा, “एक लीडर के तौर पर हरमनप्रीत की सबसे बड़ी पहचान हमेशा 2025 में वनडे वर्ल्ड कप जीतना रहेगी. उस टूर्नामेंट में उनकी बैटिंग, लीग मैच, सेमीफाइनल और फाइनल में, और कैसे टीम सभी के योगदान से वहां तक पहुंची. यह सिर्फ हरमन की वजह से नहीं था. हर खिलाड़ी के योगदान से हरमन वह ताज उठा पाईं और India जीत सका. हरमन का कद इस टीम के साथ बढ़ा है, खासकर पिछले साढ़े तीन सालों में, जब से उन्होंने वनडे की कप्तानी संभाली है. पहले, हम टी20 बहुत कम खेलते थे और शेड्यूल में ज्यादा वनडे गेम होते थे. हाल के वर्षों में यह बदल गया है. अब अधिकांश द्विपक्षीय दौरों में वनडे से ज्यादा टी20 होते हैं.”

उन्होंने कहा, “मैंने हरमन को एक खिलाड़ी और कप्तान के तौर पर बढ़ते देखा है. उनकी विरासत हमेशा इस बात से मापी जाएगी कि उन्होंने कहां से कमान संभाली और कहां छोड़ी. वनडे फॉर्मेट में इंडियन टीम वर्ल्ड चैंपियन है. जब उन्होंने कमान संभाली थी, तब की तुलना में यह टीम कहीं ज्यादा मजबूत, ज्यादा ऊर्जावान, स्किलफुल और अनुभवी है. अगर इसे आगे बढ़ाया जाए, तो यह इंडियन टीम सही रास्ते पर है.”

अंजुम ने कहा, “बतौर क्रिकेटर लंबी यात्रा के बाद भी मुझे नहीं लगता कि हरमनप्रीत कौर एक इंसान के तौर पर बदली हैं, भले ही महिलाओं के खेल के लिए उनके आस-पास की चीजें काफी बदल गई हों. मैंने उनमें कभी भी जल्दबाजी वाला पहलू नहीं देखा. उन दिनों से लेकर अब तक मैंने हरमनप्रीत कौर में हमेशा एक शांत स्वभाव देखा है. एक कप्तान के तौर पर, अगर मैदान में कोई मामूली कोशिश करता है—जैसे गेंद को रोकने में नाकाम रहना, उसे जल्दी वापस न फेंकना या एक अतिरिक्त रन देना—तो वह उस व्यक्ति को मैदान पर ही मौका देती हैं, चाहे कैमरे उन्हें पकड़ें या नहीं. लेकिन जिस पल वही व्यक्ति अच्छा स्टॉप करता है, विकेट लेता है या कैच लेता है, वह सबसे पहले दौड़कर उसकी तारीफ करती हैं. मैंने इतने सालों में कप्तान हरमन के दोनों पहलू देखे हैं. एक व्यक्ति के तौर पर हरमनप्रीत नहीं बदली हैं और यही उनकी खूबसूरती है.”

ग्लोबल इवेंट्स में टीम इंडिया के जीत की दावेदार बनने की प्रक्रिया के सवाल पर अंजुम ने कहा, “यह इसलिए बदला है क्योंकि हमने सकारात्मक तरीके से परिणाम देखना शुरू कर दिया है. मैं यह नहीं कह रही कि पहले के कप्तान परिणाम नहीं देते थे, लेकिन जब हरमन ने टीम संभाली, तो गुयाना में 2018 वर्ल्ड कप में भी, मुझे न्यूजीलैंड के खिलाफ पहला मैच याद है, उन्होंने शतक लगाया था. यह किसी भारतीय की अंतरराष्ट्रीय टी20 में पहली सेंचुरी थी.”

उन्होंने कहा, “आप इसे अप्रोच और बॉडी लैंग्वेज में देख सकते थे, और यह सिर्फ हरमन के साथ ही नहीं है – यह इस तरह के किसी भी लीडर के लिए लागू होता है. हमारे पास पहले भी लीडर रहे हैं और भविष्य में भी हमारे पास लीडर होंगे. यह एक व्यक्ति की पर्सनैलिटी और कैरेक्टर के बारे में भी है. वे कैसे हैं और वे खेल कैसे खेलते हैं, यह इंडियन टीम में भी दिखता है. जब उन्होंने टीम संभाली, तो टीम में कुछ सीनियर खिलाड़ी साथ खेल रहे थे, लेकिन वे लगातार बदल रहे थे. लेकिन यह टीम आगे बढ़ी है और हरमन इस टीम के साथ आगे बढ़ी हैं. उन्होंने सभी फॉर्मेट में कप्तान का पद 2022 में मिताली राज के रिटायर होने के बाद संभाला था.”

अंजुम ने कहा, “हरमन के इस सफर में मंधाना, दीप्ति, जेमिमा साथ रही हैं. स्मृति इतने लंबे समय से टीम में हैं और उन्होंने इतने सारे वर्ल्ड कप खेले हैं. दीप्ति लंबे समय से टीम में हैं. जेमिमा 2018 से वर्ल्ड कप का हिस्सा रही हैं.”

चोपड़ा ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि पिछले दो टी20 वर्ल्ड कप, 2024 और 2026 में India के जल्दी बाहर होने की वजह से हरमनप्रीत को कप्तानी छोड़नी पड़ी.

उन्होंने कहा, “मैं यहां पूरी ईमानदारी से कहूंगी. कप्तानी से चीजें बदल सकती हैं क्योंकि यह लीडरशिप है, लेकिन भारतीय क्रिकेट में, और काफी हद तक भारतीय खेलों में, कप्तान का कार्यकाल कभी भी साफ तौर पर तय नहीं होता है. यह लंबा हो सकता है, या छोटा भी हो सकता है. हमने किसी को डेब्यू पर कप्तानी करते भी देखा है. एक कप्तान क्रिकेट का वह स्टाइल तय नहीं करता. अलग-अलग खिलाड़ी यह तय करते हैं कि वे कैसे खेलते हैं. कोई आपको 150, 160, या 170 पर सेटल होने के लिए नहीं कहता. पिछले दो-ढाई साल से, टी20 गेम में 200 एक स्टैंडर्ड पार स्कोर बन गया है, महिला क्रिकेट में भी. जब आप वर्ल्ड कप में जाते हैं, तो आप कम से कम 180 या 190 के स्कोर की उम्मीद करते हैं, कभी-कभी इससे भी ज्यादा. अगर यही भारतीय खिलाड़ी फ्रेंचाइजी क्रिकेट में 200 रन बना रहे हैं या 220 रन का पीछा कर रहे हैं, तो टी20 वर्ल्ड कप में वह टेम्पलेट क्यों नहीं दोहराया जाता? इसे दोहराया जाना चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता है, तो इसका मतलब है कि या तो तैयारी अधूरी है, कॉन्फिडेंस नहीं है, या आप किसी वजह से इसे पूरा नहीं कर पा रहे हैं.”

चोपड़ा ने कहा, “अगर कप्तानी बदलने से आईसीसी ट्रॉफी पक्की होती है, तो इसे हर टूर्नामेंट में बदलें – इसमें कोई बुराई नहीं है. कोई शिकायत नहीं करेगा – न मैं, न मेरे सीनियर्स, और न ही मौजूदा इंडियन टीम. अगर इसका मतलब आईसीसी ट्रॉफी जीतना होता, तो हम हर टूर्नामेंट में एक नया कप्तान रख सकते थे. लेकिन टेम्पलेट प्लेयर्स को सेट करना होता है, कैप्टन को नहीं. यह बैट्समैन, बॉलर और विकेटकीपर अलग-अलग तय करते हैं और यहीं पर इंडियन टीम 2024 और 2026 दोनों में लड़खड़ा गई.”

अंजुम ने कहा, “मैंने 2025 वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले भी लगातार कहा है कि इंडिया के पास बॉलिंग की कमी है. जीत पक्की करने के लिए उन्हें दो विकेट लेने के लिए शेफाली को लाना पड़ा. मैं बहुत खुश हूं कि हमने वह वर्ल्ड कप जीता, लेकिन हमारे पास अभी भी बॉलिंग डेप्थ की कमी थी. आज भी, हम क्रांति गौड़ जैसे एक फास्ट बॉलर के साथ खेलते हैं, और नंदिनी शर्मा अभी-अभी आई हैं.”

हरमनप्रीत के इस्तीफे वाले पोस्ट में त्याग शब्द पर अंजुम ने कहा, “सबसे बड़ा त्याग जो आप करते हैं, वह है खेलने की अपनी शैली को किनारे रखना. कभी-कभी आप नंबर तीन पर बैटिंग करना चाहते हैं, लेकिन टीम को आपसे नंबर चार या ओपनिंग करने की जरूरत होती है, इसलिए आप वह मुश्किल रोल निभाते हैं. आपको टीम के फायदे को अपने फायदे से पहले रखना होगा. हो सकता है आप बॉलिंग करना चाहें या न करना चाहें, या टीम को आपकी जरूरत बाउंड्री लाइन पर हो सकती है – ये छोटी-छोटी बातें हैं. लेकिन ज्यादातर, त्याग इस बात को समझने से आता है कि टीम का फायदा पहले आता है.”

हरमनप्रीत कौर ने पांच टेस्ट, 51 वनडे और 155 टी20 मैचों में India की कप्तानी की. उनकी कप्तानी में India ने वनडे विश्व कप, एशिया कप और एशियन गेम्स में लगातार 2 गोल्ड मेडल जीते.

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पीएके