हमेशा आक्रामक अंदाज में नहीं खेलता था, मांग के हिसाब से बदलता था शैली: वीरेंद्र सहवाग

Mumbai , 29 सितंबर . पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने अपने खेलने के अंदाज को लेकर बनी एक आम धारणा को स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह हमेशा आक्रामक अंदाज में नहीं खेलते थे. उन्होंने कहा कि वह मैच की परिस्थितियों और जरूरत के मुताबिक अपनी बल्लेबाजी की शैली में बदलाव करते थे.

स्ट्रीमिंग रियलिटी शो ‘राइज एंड फॉल’ के प्रमोशन के दौरान शहर के एक पांच सितारा होटल में से बातचीत में सहवाग ने अपने क्रिकेट करियर से जुड़े इस पहलू पर बात की. सहवाग ने कहा कि खेल में उन्होंने रक्षात्मक अंदाज भी अपनाया है और मुश्किल परिस्थितियों में भी खेला है.

उन्होंने से कहा, “ऐसा नहीं है कि मैंने खेल में हमेशा आक्रामक तरीके से खेला. मैंने रक्षात्मक तरीके से भी खेला है. मैंने नकारात्मक माहौल में भी खेला है.”

सहवाग और सचिन तेंदुलकर अपने दौर की सबसे विस्फोटक सलामी जोड़ियों में शामिल रहे. दोनों ने कई मौकों पर टीम इंडिया को शानदार शुरुआत दिलाई और बल्ले से महत्वपूर्ण योगदान देकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई.

‘राइज एंड फॉल’ में अलग-अलग स्वभाव वाले प्रतियोगियों को संभालने के सवाल पर सहवाग ने कहा कि उन्हें इसका थोड़ा अनुभव है, क्योंकि उन्होंने अपने क्रिकेट करियर में अलग-अलग तरह के खिलाड़ियों और विरोधियों का सामना किया है.

उन्होंने कहा, “मेरे पास इसका थोड़ा अनुभव है, क्योंकि मैंने विरोधी टीमों में अनुशासनहीन खिलाड़ियों से निपटा है. लेकिन लोगों का अनुभव यह है कि हम रोज किसी न किसी से मिलते हैं. कोई आक्रामक होता है, कोई विनम्र होता है और कोई गुस्से में बात करता है. हमें इन सभी तरह के लोगों को संभालना पड़ता है.”

सहवाग ने कहा कि वह सभी प्रतियोगियों के साथ एक ही तरीके से पेश आने के बजाय उनकी प्रकृति को समझने की कोशिश करेंगे. उन्होंने कहा कि किसी को प्यार से, किसी को डांटकर और किसी के साथ गुस्से से भी बात करनी पड़ सकती है.

उन्होंने कहा, “मैं पहचानने की कोशिश करूंगा कि मैं इन्हें किस तरह संभाल सकता हूं. यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण है. लेकिन अगर जिंदगी में कोई चुनौती नहीं है, तो फिर इसमें मजा भी नहीं है.”

वीरेंद्र सहवाग ने ‘राइज एंड फॉल’ के दूसरे सीजन में होस्ट की जिम्मेदारी संभाली है. पहले सीजन में यह जिम्मेदारी अशनीर ग्रोवर ने निभाई थी.

रियलिटी सीरीज में 15 प्रतियोगी 42 दिनों तक चलने वाले खेल में हिस्सा लेते हैं. यह गेम सत्ता, रणनीति, गठजोड़ और बदलते समीकरणों पर आधारित है. प्रतियोगियों को ‘रूलर्स’ और ‘वर्कर्स’ में बांटा गया है. ‘रूलर्स’ टावर से खेल को नियंत्रित करते हैं, जबकि ‘वर्कर्स’ बेसमेंट में रहते हैं और ऊपर पहुंचकर खेल में अपनी स्थिति मजबूत करने के अवसर तलाशते हैं.

दूसरे सीजन में दर्शकों की भागीदारी का एक नया पहलू भी जोड़ा गया है. दर्शकों को यह प्रभावित करने की शक्ति दी गई है कि कौन प्रतियोगी ‘रूलर’ या ‘वर्कर’ बनेगा.

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डीएससी