
New Delhi, 12 अक्टूबर . सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर शुरुआती कारोबार के दौरान सोना करीब 1,400 रुपए प्रति 10 ग्राम तक टूट गया, जबकि चांदी में भी 1,400 रुपए से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली. अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में रुपए की मजबूती का असर कीमती धातुओं की कीमतों पर दिखाई दिया.
एमसीएक्स पर 4 दिसंबर डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र में 1,51,499 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जो Monday को 1,51,596 पर खुला, लेकिन शुरुआती कारोबार में तेज बिकवाली के चलते करीब 1,50,056 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर तक फिसल गया, जो 1,443 रुपए यानी 0.95 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है.
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू बाजार में गिरावट का मुख्य कारण रुपए में मजबूती और मुनाफावसूली रहा. तकनीकी रूप से सोने के लिए 1,50,000-1,50,700 रुपए का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है.
वहीं, Monday को चांदी की कीमतों में भी दबाव देखा गया. दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले सत्र में 2,25,755 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी, जो Monday को 0.11 प्रतिशत गिरकर 2,25,494 रुपए पर खुली. लेकिन कारोबार के दौरान इसमें और गिरावट दर्ज की गई और एक समय यह 1,552 रुपए यानी 0.68 प्रतिशत फिसलकर 2,24,203 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गई.
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि औद्योगिक मांग चांदी को कुछ हद तक समर्थन दे सकती है, लेकिन निकट भविष्य में रुपए की मजबूती कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है.
वहीं, वैश्विक बाजारों की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड और सिल्वर दोनों में हल्की तेजी देखी गई. सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करता नजर आया, तो वहीं चांदी में भी मजबूती देखने को मिली और यह 61.1 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती हुई नजर आई.
इसके बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें नीचे आई हैं क्योंकि निवेशकों को उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हालिया कदमों से रुपया मजबूत हो सकता है. मजबूत रुपए का मतलब है कि आयातित सोना और चांदी घरेलू बाजार में अपेक्षाकृत सस्ते पड़ते हैं.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार की नजर अब अमेरिका के मुद्रास्फीति (सीपीआई) आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की आगामी ब्याज दर नीति पर है. वहीं, दिसंबर में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीद पहले से बाजार में शामिल है.
उच्च ब्याज दरें आम तौर पर सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों के आकर्षण को कम करती हैं. इसी वजह से निवेशकों का रुख आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर बदल सकता है.
संयुक्त राष्ट्र की व्यापार एवं विकास एजेंसी ने हाल ही में अनुमान जताया है कि 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर घटकर 2.6 प्रतिशत रह सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बने हुए हैं.
हालांकि, ऐसे भू-Political जोखिम लंबे समय में सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन भी दे सकते हैं.
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने के लिए तत्काल सपोर्ट 1.50 लाख के आसपास है. यदि यह स्तर टूटता है, तो भाव 1.48 लाख रुपए तक जा सकते हैं. वहीं, ऊपर की ओर 1.52-1.53 लाख रुपए का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस माना जा रहा है.
वहीं, चांदी के लिए 2.24 लाख रुपए का स्तर महत्वपूर्ण है, जबकि मजबूती आने पर 2.28 लाख रुपए की ओर बढ़त संभव है.
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डीबीपी
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