स्वरा भास्कर की ‘जौहर’ वाली टिप्‍पणी पर अयोध्‍या के संत समाज में आक्रोश, चरित्र पर उठाए सवाल

अयोध्या, 4 सितंबर . Bollywood एक्‍ट्रेस स्वरा ने एक हालिया इवेंट में 2018 में रिलीज फिल्म ‘पद्मावत’ में दिखाए गए ‘जौहर’ के सीन पर सवाल उठाए. उन्‍होंने इसे ‘समस्याग्रस्त’ और ‘कायरता’ बताया. इसको लेकर सियासत तेज है. स्वरा की टिप्‍पणी पर अयोध्‍या के संत समाज में आक्रोश व्‍याप्‍त है. संत समाज ने स्‍वरा भास्‍कर का विरोध करते हुए उनके बयान को दुर्भाग्‍यपूर्ण और निंदनीय बताया है.

एक्ट्रेस स्वरा के बयान पर आर्य संत वरुण दास जी महाराज ने से बातचीत में कहा, “जिनका कोई चरित्र, आचरण या मर्यादा नहीं है, उनके बारे में क्या कहा जाए? जो लोग महिलाओं की गरिमा या भारतीय नारीत्व के मूल्यों को नहीं समझते, वे जौहर को नहीं समझ सकते. वे हमारी उन बहादुर महिलाओं के बलिदान को नहीं समझ सकते, जिन्होंने तलवारों से लड़ाई लड़ी और अयोध्‍या उसका सबसे बड़ा उदाहरण है.”

उन्‍होंने कहा कि जब बाबर के सेनापति मीर बाकी ने 1528 में रामजन्‍म भूमि का विध्‍वंस किया था, तो हस्‍वर (हंसवर) की राजकुमारी जयराज कुंवारी ने 10 हजार सैनिकों के साथ युद्ध लड़ा था. उन्‍होंने महिला सेना का नेतृत्‍व करते हुए मीर बाकी के सीने में खंजर घोपा था. अलाउद्दीन खिलजी के साथ के उस समय के दुश्‍मन ऐसे क्रूर राक्षस थे कि मुर्दों के साथ सहवास करने से नहीं चूकते थे. इस बात को रानी अच्‍छी तरह से जानती थी, इसीलिए अपना शरीर शुद्ध और विशुद्ध अग्नि को समर्पित कर दिया. यह बातें स्‍वरा भास्‍कर जैसी महिलाओं को कभी समझ नहीं आएगी.

महंत राजू दास जी महाराज ने कहा, “जौहर हमारी संस्कृति, महिलाओं की गरिमा और हमारी माताओं-बहनों की पवित्रता का प्रतीक है. यह हमारे देश की उन महिलाओं के आत्मचिंतन और बलिदान को दर्शाता है, जो दुर्गा, लक्ष्मी और काली के रूप में जन्म लेती हैं. ऐसी दिव्य महिलाएं हमारी माताओं और बहनों की कोख से जन्म लेती हैं. जब उनका चरित्र और आचरण पवित्र रहता है, तभी ऐसी साहसी महिलाएं जन्म लेती हैं. जिन्हें इस परंपरा की कोई समझ नहीं है, वे जौहर के बारे में क्या जानेंगे? उन्हें समाज में कोई जगह नहीं दी जानी चाहिए. सनातन धर्म के खिलाफ बार-बार अपमानजनक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.”

साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास जी महाराज कहते हैं, “स्वरा खुद एक ऐसी महिला हैं, जिन्होंने समाज और देश को बदनाम किया है. उन बहादुर महिलाओं की तपस्या, समर्पण और बलिदान पर सवाल उठाना बहुत निंदनीय है. उनका बयान समाज और उनके अपने परिवार के प्रति बहुत पिछड़ी सोच को दिखाता है. जो खुद बदनाम है, उसका ऐसी महिलाओं की बहादुरी पर सवाल उठाना सूरज पर थूकने जैसा है.”

श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के अष्टकौशल महंत डॉ. योगानंद गिरि महाराज कहते हैं, “बिल्कुल, ऐसा होना चाहिए और जिन लोगों की ऐसी सोच है, उन्हें इसका सामना करना चाहिए. कहा गया है कि इंसान की सोच और उसके शब्द ही उसकी पहचान बताते हैं, इसलिए स्वरा ने शब्दों से अपनी पहचान जाहिर की है. इस बारे में और ज्‍यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है, इंसान अपनी नीयत के हिसाब से सोचता है. इंसान जैसा होता है, वह सामने वाले के बारे में भी वैसा ही सोचता है. अगर कोई चोर है, तो वह सामने वाले को भी चोर ही समझेगा, भले ही दूसरा व्यक्ति कितना भी ईमानदार क्यों न हो? तो, स्वरा की सोच भी यही दिखाती है. ऐसी महिला के खिलाफ निश्चित रूप से First Information Report होनी चाहिए और ऐसे लोगों को पकड़कर तुरंत जेल में डाल देना चाहिए.”

उन्‍होंने कहा कि आक्रमणकारी किस हद तक जाएगा, इसका पता नहीं होता था. लेकिन पतिव्रत धर्म को धारण करने वाली हमारे सनातन की परंपरा में जौहर करने की प्रथा थी. इसी परंपरा में सती प्रथा भी थी, जिसमें पत‍ि की मृत्यु के बाद महिलाएं सती हो जाया करती थीं.

एएसएच/एबीएम