स्वदेशी युद्धपोत ‘मंगरोल’ भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल

New Delhi, 12 अक्टूबर . स्वदेशी युद्धपोत ‘मंगरोल’ Monday को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हो गया. 12 अक्टूबर को यह युद्धपोत नौसेना का हिस्सा बना. यह भारतीय युद्धपोत दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगा सकता हैं. यह पानी के भीतर से आने वाले खतरों का मुकाबला करने में भी सक्षम हैं.

यह युद्धपोत उथले समुद्री क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा मुहिम को मजबूती देगा. इसे Mumbai स्थित नौसेना डॉक में आयोजित समारोह में शामिल किया गया. इस महत्वपूर्ण समारोह की अध्यक्षता पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन ने की. इसमें नौसेना और रक्षा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा मंत्रालय तथा कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के प्रतिनिधि, पूर्व नौसैनिक और स्वदेशी हथियार एवं सेंसर बनाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए.

इस पर मौके वाइस एडमिरल संजय वात्सायन ने कहा कि बदलते समुद्री सुरक्षा परिदृश्य में स्वदेशी युद्धपोत India की समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

उन्होंने India के स्वदेशी जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती क्षमताओं पर भी जोर दिया. साथ ही, उन्होंने रक्षा निर्माण में तकनीकी प्रगति, अभियान संबंधी तैयारियों और आत्मनिर्भरता के प्रति भारतीय नौसेना की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित किया.

कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि में निर्मित यह इस श्रेणी का तीसरा पनडुब्बी रोधी युद्धपोत है. नौसेना में शामिल ‘मंगरोल’ की प्रमुख विशेषता इसका स्वदेशी निर्माण है. इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है. इसका निर्माण केंद्र Government की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत किया गया है. नौसेना के ‘मंगरोल’ को तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए तैयार किया गया है.

इस जहाज पर ‘अभय’ नामक सोनार, हल्के तारपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट प्रक्षेपक और ‘मारीच’ उन्नत तारपीडो डिकॉय सिस्टम लगाया गया है. ये प्रणालियां पानी के भीतर मौजूद खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने में मदद करेंगी. यह युद्धपोत तीन डीजल इंजनों से संचालित होता है.

इसमें जलधारा प्रणोदन प्रणाली दी गई है, जिससे उथले पानी में तेजी से दिशा बदलना और सीमित समुद्री क्षेत्रों में संचालन करना आसान होता है.

इसके अलावा, यह पानी के भीतर निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों और समुद्री बारूदी सुरंगों से जुड़े कार्यों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इस युद्धपोत का नाम Gujarat के जूनागढ़ जिले के तटीय कस्बे और प्रमुख बंदरगाह मंगरोल के नाम रखा गया है.

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जीसीबी/एमएस