स्वदेशी गश्ती पोत ‘अजीत’ तटरक्षक बल में शामिल, ओखा में होगी तैनाती

New Delhi, 9 अक्टूबर . स्वदेशी तेज गश्ती पोत ‘अजीत’ को भारतीय तटरक्षक बल में शामिल किया गया है. समुद्र में तस्करी रोकने से लेकर संकट में फंसे लोगों को बचाने तक में ‘अजीत’ की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रहेगी.

दरअसल, स्वदेशी तेज गश्ती पोत ‘अजीत’ को 9 अक्टूबर को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में भारतीय तटरक्षक बल में शामिल किया गया है. यह आधुनिक हथियारों और नियंत्रण प्रणालियों से लैस है. तटरक्षक बल में शामिल किए जाने के बाद इस पोत को Gujarat के ओखा में तैनात किया जाएगा. यहां से यह पोत समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा से जुड़े अभियानों में अहम भूमिका निभाएगा.

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ‘अजीत’ को समुद्र में निगरानी, खोज एवं बचाव, तस्करी रोकने और समुद्री प्रदूषण से निपटने जैसे कार्यों के लिए तैयार किया गया है. इसकी तैनाती से तटरक्षक बल को समुद्र में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी. आपात स्थिति में यह पोत समुद्र में फंसे लोगों को बचाने के अभियान भी चला सकेगा.

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में निर्मित ‘अजीत’ India की स्वदेशी रक्षा जहाज निर्माण क्षमता का उदाहरण है. इसमें आधुनिक हथियारों के साथ उन्नत नियंत्रण प्रणालियां लगाई गई हैं. इसका निर्माण देश में ही सुरक्षा पोत तैयार करने और आत्मनिर्भर India के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

पोत को तटरक्षक बल में शामिल करने के समारोह की अध्यक्षता डॉ. सिरीश चौधरी ने की. वह तटरक्षक बल के प्रधान एकीकृत वित्तीय सलाहकार हैं.

Gujarat के ओखा में तैनाती के बाद ‘अजीत’ समुद्री क्षेत्र में निगरानी, तस्करी विरोधी कार्रवाई और बचाव अभियानों में योगदान देगा. इससे तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता को मजबूती मिलेगी और समुद्र में सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी. इससे कुछ दिन पहले ही भारतीय तटरक्षक बल स्वदेश में निर्मित समुद्री पोत को शामिल किया गया था. यह एयर कुशन व्हीकल एसीवी एच-562 था.

तट रक्षक बल के मुताबिक, यह India में स्वदेशी रूप से निर्मित दूसरा एयर कुशन व्हीकल है. एयर कुशन व्हीकल के शामिल होने से तटरक्षक बल की समुद्री तैयारियों को और मजबूती मिली है. यह पोत तटरक्षक बल की समुद्री क्षेत्र में पहुंच और अभियान क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा. खास तौर पर ऐसे क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता महत्वपूर्ण होगी, जहां सामान्य पोतों के लिए पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

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जीसीबी/एएसएच