स्वच्छ हवा विलासिता नहीं, बल्कि बुनियादी जरूरत है: एनजीटी प्रमुख

New Delhi, 7 सितंबर . अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ वायु एवं नीले आकाश दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रकाश श्रीवास्तव ने Monday को कहा कि वायु प्रदूषण एक जटिल चुनौती है, क्योंकि यह Political सीमाओं को नहीं मानता. उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा कोई विलासिता नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की बुनियादी आवश्यकता है.

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘स्वच्छ वायु दिवस 2026’ कार्यक्रम में संबोधित करते हुए रिटायर्ड न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं. दोनों साथ-साथ चल सकते हैं और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकते हैं.

एनजीटी अध्यक्ष ने कहा कि यह प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण मिले.

उन्होंने कहा, ”स्थानीय निकायों को प्रदूषण के स्रोत पर ही रोकथाम के लिए प्रयास करने चाहिए. इसके लिए लोगों को जागरूक बनाया जाए, नवीनतम तकनीकों का उपयोग किया जाए और समाज के सभी वर्गों को शामिल करते हुए सामूहिक प्रयास किए जाएं.”

कार्यक्रम में पर्यावरण सचिव तनमय कुमार ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi के विजन के अनुसार Government वायु प्रदूषण से निपटने के लिए बहुआयामी, समन्वित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपना रही है.

इस अवसर पर पर्यावरण मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत 5वें स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों और वार्डों को सम्मानित भी किया.

यह पुरस्कार 130 शहरों के प्रदर्शन के आधार पर दिए गए. शहरों को तीन श्रेणियों में बांटा गया था, जिनमें 3 लाख से कम आबादी वाले, 3 से 10 लाख आबादी वाले और 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर शामिल थे.

मूल्यांकन प्रक्रिया में शहरों द्वारा स्वयं मूल्यांकन, राज्य स्तरीय निगरानी समिति की मंजूरी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा समीक्षा, स्वतंत्र समितियों द्वारा फील्ड सत्यापन और अंत में 10 सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शहरों का चयन शामिल था.

पर्यावरण सचिव तनमय कुमार ने बताया कि एनसीएपी के तहत प्रत्येक शहर अपनी जरूरतों के अनुसार स्वच्छ हवा के लिए रणनीति तैयार करता है. वहीं, प्राणा पोर्टल इन 130 शहरों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मानकों की निगरानी करता है.

सरकारी बयान के अनुसार, एनसीएपी के तहत वर्ष 2025-26 में पीएम10 स्तरों में वित्त वर्ष 2017-18 की तुलना में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है.

130 में से 108 शहरों में पीएम10 स्तरों में सुधार देखा गया. इनमें से 72 शहरों ने पीएम10 सांद्रता में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी हासिल की, जबकि 26 शहरों में यह कमी 40 प्रतिशत से अधिक रही. इसके अलावा 14 शहर राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में सफल रहे.

कार्यक्रम के दौरान एनसीएपी के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ प्रबंधन प्रथाओं की संकलन रिपोर्ट भी जारी की गई.

इस रिपोर्ट में विभिन्न शहरों और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों/समितियों द्वारा वायु गुणवत्ता सुधार के लिए अपनाए गए सफल उपायों को शामिल किया गया है. इनमें सड़क की धूल पर नियंत्रण, वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी, खुले में कचरा जलाने पर रोक, हरित क्षेत्र बढ़ाना, तकनीक का उपयोग और जनजागरूकता अभियान जैसे महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं.

एएमटी/डीकेपी