
संयुक्त राष्ट्र, 22 अक्टूबर . दुनिया भर में सेना और रक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल बढ़ रहा है. इसी बीच India ने कहा है कि वह रक्षा क्षेत्र में एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय विकसित कर रहा है.
भाजपा की Lok Sabha सांसद कमलजीत सहरावत ने Wednesday को कहा कि India ने रक्षा क्षेत्र में एआई की विश्वसनीयता जांचने के लिए एक घरेलू फ्रेमवर्क तैयार किया है. यह भरोसा, सुरक्षा और पारदर्शिता जैसे सिद्धांतों पर आधारित है.
उन्होंने बताया कि India उन देशों में शामिल था, जिन्होंने सेना में एआई के इस्तेमाल पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की पहली अनौपचारिक चर्चा का समर्थन किया था. यह बैठक जून में जिनेवा में आयोजित की गई थी.
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पिछले साल दिसंबर में एक प्रस्ताव पारित कर ‘सैन्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उसके अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा पर प्रभाव’ विषय पर इस अनौपचारिक चर्चा को आयोजित करने का आह्वान किया था.
निरस्त्रीकरण से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति को संबोधित करते हुए सहरावत ने कन्वेंशन ऑन सर्टेन कन्वेंशनल वेपन्स (सीसीडब्ल्यू) से जुड़े कई मुद्दों पर भी बात की.
यह समझौता ऐसे हथियारों से संबंधित है, जो अत्यधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं. India इसके सभी पांच प्रोटोकॉल में शामिल हो चुका है.
उन्होंने कहा कि India आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेज) यानी देसी बमों से होने वाले खतरों को कम करने और पीड़ितों की मदद को बहुत महत्व देता है. दूसरा प्रोटोकॉल ऐसे आईईडी से निपटने का एक ढांचा प्रदान करता है, जिनका इस्तेमाल अक्सर आतंकवादी और अवैध हथियारबंद समूह करते हैं.
उन्होंने कहा कि India ने इस प्रोटोकॉल के तहत अपनी सभी जिम्मेदारियों का पालन किया है, जिसमें लैंडमाइंस और आईईडी से जुड़े नियम शामिल हैं. India ने ऐसी बारूदी सुरंगों का उत्पादन नहीं किया है, जिन्हें आसानी से खोजा न जा सके, और सभी एंटी-पर्सनल माइंस को पहचानने योग्य बनाया है. India ‘प्रोटोकॉल वी’ का भी सदस्य है, जो युद्ध के बाद बच जाने वाले विस्फोटक अवशेषों को हटाने से संबंधित है. India युद्ध के ऐसे अवशेषों से होने वाले मानवीय नुकसान को लेकर गंभीर है.
इस समस्या को कम करने में योगदान देने के लिए India ने पिछले कुछ वर्षों में कई देशों में 30 से अधिक कृत्रिम अंग लगाने से संबंधित शिविर आयोजित किए हैं. इन शिविरों के जरिए 15,000 से ज्यादा लोगों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे युद्ध और विस्फोटों से प्रभावित पीड़ितों को मदद मिली है.
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एवाई/एबीएम
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