
New Delhi, 13 अक्टूबर . टाटा संस के चेयरमैन एन.चंद्रशेखरन ने Tuesday को कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र जैसे रणनीतिक क्षेत्र के लिए धैर्यवान पूंजी की आवश्यकता है और इसके लिए छोटी अवधि के लक्ष्यों से अधिक लंबी अवधि के नजरिए की आवश्यकता है.
राष्ट्रीय राजधानी में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026 में बोलते हुए, चंद्रशेखरन ने कहा कि लक्ष्य दो साल में पूरे होते हैं या तीन साल में, यह अहम बात नहीं है क्योंकि चिप्स ही भविष्य का आधार बनने वाली हैं.
उन्होंने कहा कि दुनिया ने पहले भी मुश्किल दौर देखे हैं, लेकिन इस बार की स्थिति इसलिए अलग है क्योंकि भू-Political उथल-पुथल, धातुओं की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला जैसे संकट एक ही समय पर हो रहे हैं.
उन्होंने कहा, “अगर आप इस सोच के साथ इसे डिजाइन करते हैं कि इसकी जरूरत भारत, इंसानियत और कंपनियों को है, तो आप सही दिशा में आगे बढ़ेंगे. इसका मतलब यह नहीं है कि सब कुछ आसानी से हो जाएगा.”
उन्होंने आगे कहा कि India का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात पांच साल पहले के लगभग 12 अरब डॉलर से बढ़कर इस साल 48 अरब डॉलर हो गया है.
चंद्रशेखरन ने कहा कि महत्वाकांक्षा के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन भी जरूरी है.
उन्होंने कहा, “आपको बैलेंस शीट पर नजर रखनी होगी. इसलिए आप लापरवाही नहीं बरत सकते.”
उन्होंने कहा कि सिर्फ 2-नैनोमीटर चिप की घोषणा करने से काम नहीं चलेगा; टाटा को बाजार की मांग के हिसाब से चलना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि India को ग्लोबल पार्टनर्स की जरूरत है क्योंकि अभी हमारे पास सभी तरह की टेक्नोलॉजी मौजूद नहीं हैं.
इसके अलावा, चंद्रशेखरन ने इस बात से असहमति जताई कि मजबूती हासिल करने के लिए कार्यक्षमता से समझौता करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि उतार-चढ़ाव वाले माहौल में मजबूती के हिसाब से सिस्टम तैयार करना ही असल में कार्यक्षमता को बेहतर बनाने का एक तरीका है.
उन्होंने जैगुआर लैंड रोवर पर हुए साइबर हमले का उदाहरण दिया, जिसकी वजह से लगभग छह हफ्तों तक प्रोडक्शन रुका रहा. साथ ही, उन्होंने मैग्नेट की कमी जैसी आपूर्ति से जुड़ी दिक्कतों का भी जिक्र किया, जिनसे गाड़ियों का प्रोडक्शन रुक सकता है.
उन्होंने कहा कि इन झटकों के बावजूद, ग्रुप दोहरे अंकों की ग्रोथ हासिल करने और मार्जिन बनाए रखने की राह पर है.
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एबीएस
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