सेंसेक्स को 71,000-71,200 के स्तर पर सपोर्ट मिलने की संभावना, निफ्टी के लिए 22,800 का टारगेट: एक्सपर्ट्स

Mumbai , 4 अक्टूबर . भारतीय शेयर बाजार ने लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ कारोबार समाप्त किया. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर वैश्विक संकेतों ने बाजार पर दबाव बनाए रखा. हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी संकेतकों के आधार पर निकट अवधि में राहतभरी तेजी (रिलीफ रैली) देखने को मिल सकती है.

पिछले सप्ताह बाजार में कमजोरी का दौर लगातार जारी रहा. Monday को सेंसेक्स 1.52 प्रतिशत गिरा और इसके बाद भी बिकवाली का दबाव बना रहा. Thursday को सूचकांक में 0.79 प्रतिशत की और गिरावट दर्ज हुई. पूरे सप्ताह में सेंसेक्स 1,670.84 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई.

Thursday को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ. विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली, ऊंची बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में ताजा उछाल ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया.

सत्र के अंत में सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत गिरकर 71,909.70 पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान यह 71,292.88 के स्तर तक फिसल गया, जो इसका नया 52-सप्ताह का निचला स्तर रहा. वहीं निफ्टी 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत गिरकर 22,421.95 पर बंद हुआ.

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल सेंसेक्स अपने प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रहा है. यह 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) 75,544.56 और 200-दिवसीय ईएमए 77,684.60 से काफी नीचे है, जो बाजार में कमजोरी का संकेत देता है.

हालांकि तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि सेंसेक्स के लिए 71,000 से 71,200 के बीच का क्षेत्र एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है. यदि यह स्तर बरकरार रहता है, तो बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिल सकती है. दूसरी ओर, 72,300 से 72,500 का दायरा निकट अवधि का प्रमुख रेजिस्टेंस क्षेत्र माना जा रहा है.

विश्लेषकों का मानना है कि व्यापक बाजार संरचना अभी भी कमजोर बनी हुई है, लेकिन ओवरसोल्ड संकेतकों और महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों के करीब पहुंचने के कारण निकट अवधि में उछाल संभव है.

बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और हेज्ड रणनीति अपनाने की सलाह दी है. उनके अनुसार, निफ्टी के लिए 22,800 पहला अपसाइड लक्ष्य हो सकता है. इसके बाद 23,100 से 23,200 का स्तर अगला संभावित लक्ष्य रहेगा.

हालांकि यदि निफ्टी अप्रैल के निचले स्तरों से भी नीचे चला जाता है, तो रिकवरी की संभावना कमजोर पड़ सकती है. ऐसी स्थिति में सूचकांक 21,700 से 22,000 के दायरे तक फिसल सकता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, बॉन्ड यील्ड्स और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी. यदि विदेशी बिकवाली कम होती है और तेल कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार में राहत की संभावना बढ़ सकती है. वहीं, वैश्विक अनिश्चितताएं बनी रहने पर अस्थिरता जारी रह सकती है.

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डीबीपी