सूखा राहत पर शिवसेना उद्धव गुट का हमला, किसानों को 5,000 रुपए की मदद को बताया छलावा

Mumbai , 29 अक्टूबर . शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने Thursday को राज्य Government द्वारा सूखा प्रभावित किसानों को अग्रिम राहत के तौर पर 5,000 रुपए देने की घोषणा की कड़ी आलोचना की. पार्टी ने इस फैसले को धोखाधड़ीपूर्ण और खोखला दिखावा करार दिया. पार्टी का कहना है कि सूखे से जूझ रहे किसानों को वास्तविक और पर्याप्त सहायता की आवश्यकता है और 5,000 रुपए की यह राहत केवल एक दिखावटी कदम है, जिससे किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होने वाला.

ठाकरे गुट ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में छपे एक तीखे संपादकीय में तर्क दिया है कि Maharashtra में सूखे की मार झेल रहे लगभग 1.50 करोड़ किसानों के साथ मजबूती से खड़े होने के बजाय सत्ताधारी Government ने “33 प्रतिशत की शर्त” लगाकर असल में उनकी पीठ में छूरा घोंपा है.

संपादकीय में कहा गया है कि Government ने 5,000 रुपए की अग्रिम सहायता तुरंत बांटने के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन अब इस राहत को केवल उन्हीं इलाकों तक सीमित कर दिया गया है, जहां फसल के नुकसान का आकलन (पंचनामा) पूरा हो चुका है और फसल का नुकसान 33 प्रतिशत से अधिक है. इसमें बताया गया है कि इस तरह के सख्त नियम लागू करने से भीषण सूखे के इस दौर में संकट से जूझ रहे 1.50 करोड़ किसानों में से लगभग आधे किसान पूरी तरह खाली हाथ रह जाएंगे.

खरीफ की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है और बारिश न होने के कारण रबी की बुआई भी लगभग नामुमकिन लग रही है. ऐसे में ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी और चारे का भारी संकट पैदा हो गया है. Government ने निर्देश दिए हैं कि जो निजी फाइनेंस कंपनियां और साहूकार कर्ज वसूली के लिए किसानों को परेशान कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसके बावजूद किसानों को डराने-धमकाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है.

संपादकीय में नांदेड़ और लातूर के उन मामलों का जिक्र किया गया है, जहां कर्ज के दबाव में आकर किसानों ने अपनी जान दे दी. कहा है कि इससे यह सवाल उठता है कि क्या Government के आदेश वास्तव में जमीनी स्तर तक पहुंच भी रहे हैं या नहीं.

संपादकीय में कहा गया है कि मानसून खत्म होने के कई हफ्तों बाद ‘मृदा एवं जल संरक्षण विभाग ने अचानक पानी सोखने वाले गड्ढे खोदने का काम शुरू कर दिया है. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने इन देर से उठाए गए कदमों को बहुत देर हो जाने के बाद की गई कार्रवाई की संज्ञा दी है. पार्टी ने कहा कि चूंकि अब बारिश की कोई उम्मीद नहीं है, इसलिए सवाल यह उठता है कि क्या Government इन हजारों नए खोदे गए गड्ढों को पानी के टैंकरों से भरने की योजना बना रही है?

संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि ऐसी परियोजनाएं ग्रामीण इलाकों की प्यास बुझाने के बजाय, ठेकेदारों और बिचौलियों की जेबें भरने के लिए बनाई गई हैं.

इस गंभीर वास्तविकता को सामने रखते हुए संपादकीय में कहा गया है कि सत्ता में बैठे लोग भले ही बड़े-बड़े दावे करते हों, लेकिन प्रशासन की नौकरशाही की अड़चनें और पात्रता संबंधी शर्तें एक ऐसे “अल नीनो” की तरह काम करती हैं, जो प्राकृतिक सूखे से भी कहीं अधिक खतरनाक साबित होती हैं.

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ओपी/