सुदेश लहरी : कभी चाय बेचकर चलाते थे घर, स्टेज पर खाया थप्पड़, फिर ऐसे चमकी किस्मत

Mumbai , 26 अक्टूबर . कॉमेडी की दुनिया में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जो अपनी आवाज, चेहरे के हाव-भाव और बोलने के अंदाज से ही लोगों को हंसने पर मजबूर कर देते हैं. सुदेश लहरी भी ऐसे ही कलाकारों में शामिल हैं. आज उन्हें टीवी के कॉमेडी शोज और फिल्मों में अपनी अलग पहचान के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा.

कभी परिवार की आर्थिक मदद के लिए उन्हें छोटी-छोटी दुकानों और फैक्ट्रियों में काम करना पड़ा, तो कभी लोगों के सामने गाना गाकर पैसे कमाने पड़े. उनकी जिंदगी में एक ऐसा भी दिन आया, जब स्टेज पर गाते समय एक शख्स ने उन्हें थप्पड़ मार दिया. इस घटना ने उन्हें अंदर तक हिला दिया और उन्होंने अपनी जिंदगी बदलने का फैसला कर लिया. यही संघर्ष आगे चलकर उन्हें कॉमेडी की दुनिया में पहचान दिलाने वाले सफर का हिस्सा बना.

सुदेश लहरी का जन्म 27 अक्टूबर 1968 को पंजाब के जालंधर में हुआ था. उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें बचपन में पढ़ाई करने के ज्यादा मौके नहीं मिले. परिवार की मदद करने के लिए उन्होंने छोटी उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया था. वह कभी चाय की दुकान पर काम करते, कभी फैक्ट्री में जूते बनाने में मदद करते, तो कभी सब्जियां और कुल्फी बेचकर पैसे कमाते थे. इन कामों के दौरान उन्होंने आम लोगों के बोलने और व्यवहार करने के तरीके बारीकी से देखे. बाद में यही अनुभव उनके अभिनय और कॉमेडी में भी काम आए.

सुदेश को बचपन से ही गाने और लोगों की नकल करने का शौक था. वह पंजाब में होने वाले शादी-ब्याह और दूसरे कार्यक्रमों में ऑर्केस्ट्रा के साथ गाना गाते थे. उस समय उन्हें एक शो के करीब एक हजार रुपए मिलते थे. वह महीने में कई कार्यक्रम करते थे, जिससे परिवार का खर्च चलाने में मदद मिलती थी. बाहर से देखने पर यह काम ठीक लगता था, लेकिन इस दौरान उन्हें कई बार ऐसे लोगों का सामना करना पड़ता था, जो कलाकारों को इज्जत नहीं देते थे.

उनकी जिंदगी का सबसे मुश्किल मोड़ भी इसी दौरान आया. मनीष पॉल के पॉडकास्ट में सुदेश ने बताया था कि एक कार्यक्रम में गाते समय शराब के नशे में एक व्यक्ति स्टेज पर आया. उसने उनका कॉलर पकड़ा और उन्हें थप्पड़ मार दिया. थप्पड़ लगने से उनका माइक्रोफोन भी गिर गया. वह इस घटना से इतने दुखी हुए कि ग्रीन रूम में जाकर रोने लगे. उन्हें लगा कि अगर कलाकार को अपनी कला दिखाने के बदले ऐसी बेइज्जती सहनी पड़े, तो इस काम में आगे बढ़ने का क्या मतलब है.

इस घटना के बाद सुदेश ने तय किया कि वह अब ऑर्केस्ट्रा में गाना नहीं गाएंगे. उन्होंने मन में ठान लिया कि एक दिन वह इतने बड़े कलाकार बनेंगे कि लोग उन्हें पहचानेंगे और सम्मान देंगे. उन्हें अपने नए सफर के लिए पैसे भी जुटाने थे. उन्होंने लोगों से मदद लेकर और कमेटी के जरिए पैसे इकट्ठा करके पंजाबी कॉमेडी कैसेट तैयार की. इस काम में करीब 15 से 20 हजार रुपए खर्च हुए. उनकी पहली कैसेट को अच्छा रिस्पॉन्स मिला. इसके बाद उन्होंने और कैसेट बनाईं और धीरे-धीरे म्यूजिक कंपनियों से काम मिलने लगा.

सुदेश की कॉमेडी में आम जिंदगी से जुड़े अनुभवों की झलक मिलती है. उनकी बोलने की शैली और चेहरे के हाव-भाव ने उन्हें बाकी कलाकारों से अलग पहचान दी. उन्होंने पंजाबी मनोरंजन जगत में काम करने के बाद फिल्मों और टीवी की दुनिया में कदम रखा. साल 2004 में वह पंजाबी फिल्म ‘घुग्गी छू मंतर’ में नजर आए. बाद में उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी काम किया.

उनके करियर को बड़ा मौका ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ के तीसरे सीजन से मिला. इस शो के जरिए वह घर-घर में पहचाने जाने लगे. इसके बाद ‘कॉमेडी सर्कस’, ‘कॉमेडी क्लासेज’, ‘कॉमेडी नाइट्स बचाओ’ और ‘द कपिल शर्मा शो’ जैसे कार्यक्रमों में उन्होंने दर्शकों को खूब हंसाया. कृष्णा अभिषेक के साथ उनकी जोड़ी भी काफी लोकप्रिय हुई.

सुदेश ने फिल्मों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. वह ‘रेडी’, ‘जय हो’, ‘ग्रेट ग्रैंड मस्ती’, ‘टोटल धमाल’ और ‘ड्रीम गर्ल 2’ जैसी फिल्मों में नजर आए. उन्होंने पंजाबी फिल्मों में भी काम जारी रखा.

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पीके/एबीएम