
New Delhi, 26 अक्टूबर . केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने Monday को एक बयान में बताया कि New Delhi के राउज एवेन्यू स्थित एक विशेष सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी के आरोपी संजीव दीक्षित उर्फ संजय शर्मा को दोषी ठहराते हुए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही दोषी पर 1.6 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
सीबीआई के अनुसार, 11 जुलाई 2013 को मेसर्स शंकर मेटल्स के मालिक दीक्षित, मेसर्स सुपर मशीन्स के मालिक संजय शर्मा, इंदिरा रानी और कुछ अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था.
आरोपियों ने एक आपराधिक साजिश के तहत जाली प्रॉपर्टी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके पंजाब नेशनल बैंक की New Delhi स्थित जोर बाग शाखा से 4 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट सुविधा धोखाधड़ी से हासिल की.
सीबीआई के बयान में कहा गया है कि लोन की रकम का इस्तेमाल उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया गया, जिनके लिए यह क्रेडिट सुविधा मंजूर की गई थी, बल्कि इसे कहीं और डायवर्ट कर दिया गया.
सीबीआई ने बताया कि 2016 में एक अन्य मामले के सिलसिले में सोनीपत की अदालत में पेशी के दौरान दीक्षित न्यायिक हिरासत से भाग गया था. इसके बाद वह फरार हो गया और 23 नवंबर 2017 को ट्रायल कोर्ट ने उसे ‘घोषित अपराधी’ करार दे दिया.
जनवरी 2026 में सीबीआई को जानकारी मिली कि यह घोषित अपराधी वडोदरा में ‘पंकज भारद्वाज’ (ब्रज मोहन भारद्वाज का बेटा) के नाम से एक फर्जी पहचान बनाकर रह रहा है.
इस सूचना के आधार पर सीबीआई ने Rajasthan के बांसवाड़ा जिले में स्थित माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में उसका पता लगाया और 30 जनवरी को उसे गिरफ्तार कर लिया.
ट्रायल के दौरान दीक्षित ने आपराधिक साजिश, पहचान बदलकर धोखाधड़ी करने, धोखाधड़ी, कीमती दस्तावेजों में जालसाजी, धोखाधड़ी के इरादे से जालसाजी करने और जाली दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने के आरोपों को स्वीकार किया. इसके बाद 24 अक्टूबर को राउज एवेन्यू कोर्ट ने संजीव दीक्षित को दोषी ठहराया और सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई, साथ ही 1.6 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया.
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ओपी/एएस
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