
Lucknow, 1 अक्टूबर ) सीबीआई की विशेष अदालत, Lucknow ने एलआईसी में हुए 6.37 करोड़ रुपए के बड़े घोटाले के मामले में चार लोगों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है. यह फैसला कोर्ट ने 30 सितंबर को सुनाया.
इस मामले में दोषियों में एक सरकारी कर्मचारी पंकज सक्सेना है, जो उस समय एलआईसी की ट्रांसगोमती ब्रांच, जानकीपुरम, Lucknow में हायर ग्रेड असिस्टेंट के पद पर तैनात था. इसके अलावा तीन व्यक्ति, प्रेम शंकर उपाध्याय, रेखा उपाध्याय और मनीष सक्सेना भी शामिल हैं.
कोर्ट ने सरकारी कर्मचारी पंकज सक्सेना को 10 साल के कठोर कारावास और 5 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है. वहीं, तीन अन्य आरोपियों प्रेम शंकर उपाध्याय, रेखा उपाध्याय और मनीष सक्सेना को तीन-तीन साल के कठोर कारावास और 1.25-1.25 लाख रुपए जुर्माने की सजा दी गई है.
सीबीआई ने यह केस 13 अगस्त 2012 को दर्ज किया था. यह केस एलआईसी की ट्रांसगोमती ब्रांच के चीफ मैनेजर की शिकायत पर दर्ज किया गया था. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फरवरी 2006 से अगस्त 2010 के बीच आरोपियों ने आपस में साजिश रची.
आरोपियों ने फर्जी और गैर-मौजूद पॉलिसीधारकों के नाम पर जाली पेमेंट वाउचर और चेक तैयार किए और एलआईसी के पैसों को धोखाधड़ी से निकाल लिया. इस तरह लगभग 6 करोड़ 37 लाख 66 हजार 660 रुपए का घोटाला किया गया.
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 21 अगस्त 2014 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें एलआईसी ट्रांसगोमती ब्रांच के अधिकारी भी शामिल थे. लंबी सुनवाई के बाद अब कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है.
इससे पहले Wednesday को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कोर्ट ने रिश्वत के मामले में इनकम टैक्स ऑफिसर को 5 वर्ष की सख्त सजा और 1.5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था.
दरअसल, औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) की सीबीआई कोर्ट ने रिश्वत के एक मामले में सतीश कुमार भदानी को दोषी ठहराया और सजा सुनाई थी. भदानी उस समय जलगांव (Maharashtra) के इनकम टैक्स ऑफिस में इनकम टैक्स ऑफिसर (आईटीओ) थे. उनके खिलाफ पांच वर्ष की सख्त सजा और 1.5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया था.
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एबीएम
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