
New Delhi, 10 अक्टूबर . केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने Saturday को उस वायरल पोस्ट का खंडन कर दिया, जिसमें यह दावा किया गया था कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ई-कॉमर्स पर 5 प्रतिशत का GST लगा दिया है.
social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वायरल पोस्ट को सीबीआईसी ने कोट करते हुए कहा, “इस पोस्ट में किया गया दावा फर्जी और तथ्यों के आधार पर गलत है.
डिलीवरी सेवाओं जैसे कि फूड ऐप्स द्वारा दी जाने वाली सेवाओं, पर पहले 18 प्रतिशत टैक्स लगता था.
GST काउंसिल की 57वीं बैठक में की गई सिफारिश के अनुसार, अब इन डिलीवरी सेवाओं पर टैक्स घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है.”
सरकारी एजेंसी ने आगे कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए दी जाने वाली सभी डिलीवरी सेवाओं पर अब एक समान 5 प्रतिशत टैक्स लगता है. इसलिए, कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है. इसके विपरीत टैक्स में कमी की गई है.
साथ ही कहा, “आपसे अनुरोध है कि गलत खबरें न फैलाएं.”
वायरल पोस्ट में कहा गया था, “यह दावा करने के सिर्फ 48 घंटे बाद कि Government ने कोई टैक्स नहीं बढ़ाया है, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ई-कॉमर्स डिलीवरी सेवाओं पर 5 प्रतिशत GST लगा दिया है.”
इसके अलावा, GST परिषद की Thursday को हुई 57 वीं बैठक में देश में व्यापार में आसानी को बढ़ाने के लिए कई फैसले लिए गए, जिसमें रिफंड प्रक्रिया को तेज करना और आईटीसी का विस्तार भी शामिल हैं.
GST परिषद की 57वीं बैठक में रिफंड प्रोसेस को तेज बनाने का प्रस्ताव दिया गया है. इसके तहत अब रिफंड क्लेम को स्वीकार करने की अवधि को 15 दिनों से घटाकर 10 दिन कर दिया गया है. अगर इस समय-सीमा के अंदर न तो कोई रिफंड क्लेम स्वीकार होता है और न ही इसमें किसी कमी के बारे में सूचना जारी की जाती है, तो क्लेम को स्वीकार किया हुआ माना जाएगा.
इसके अलावा, GST परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का भी विस्तार किया है.
अब कर्मचारियों के लिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस और फैक्ट्रियों के बाहर लगाए गए टेलीकम्युनिकेशन टावर और पाइपलाइन पर आईटीसी मिलेगा. फ्री सैंपल और एक्सपायरी की वजह से राइट-ऑफ किए गए स्टॉक पर भी आईटीसी मिलेगा, बशर्ते कानून के तहत उन सामानों को नष्ट करना जरूरी हो.
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एबीएस
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