
New Delhi, 9 अक्टूबर . भारतीय नौसेना के कारवार अड्डे को और बड़े नौसैनिक केंद्र के रूप में विकसित करने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. यहां जहाजों और पनडुब्बियों की तैनाती के साथ-साथ नौसैनिकों और उनके परिवारों के लिए भी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं. इसी दिशा में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने यहां नए आवासों और जरूरी बुनियादी ढांचे का उद्घाटन किया है. यह कारवार में जारी निर्माण प्रोजेक्ट सीबर्ड के दूसरे चरण का हिस्सा है.
नौसेना के मुताबिक इस परियोजना के तहत कारवार में आधुनिक नौसैनिक हवाई अड्डा, नौसैनिक डॉक और जहाजों व विमानों के लिए रसद सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. वहीं, नौसैनिकों के लिए नए आवास, बच्चों के लिए विद्यालय, मंजिल क्रीक के पूर्वी क्षेत्र और अमदाल्ली में नई आवासीय सुविधाएं तैयार की गई हैं. इनमें नौसैनिकों के परिवारों के लिए 60 आवासीय इकाइयों वाला एक भवन शामिल है.
रक्षा विभाग के नागरिक कर्मचारियों के लिए भी 60 आवासीय इकाइयों वाला भवन बनाया गया है. इसके अलावा, रक्षा सुरक्षा कोर के 156 कर्मियों के रहने की व्यवस्था की गई है. यहां एक बालवाटिका विद्यालय भी बनाया गया है. इन सुविधाओं से नौसैनिक अड्डे पर तैनात कर्मियों और उनके परिवारों को लाभ मिलेगा. उद्घाटन के दौरान प्रोजेक्ट सीबर्ड के महानिदेशक वाइस एडमिरल विवेक दहिया और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. प्रोजेक्ट सीबर्ड का दूसरा चरण कारवार नौसैनिक अड्डे की क्षमताओं को बढ़ाने पर केंद्रित है. इसके तहत युद्धपोतों और पनडुब्बियों की तैनाती के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं.
नौसैनिक हवाई अड्डे, आधुनिक डॉक और रसद व्यवस्था का विकास भी इसी योजना का हिस्सा है. इन सुविधाओं से नौसेना की परिचालन जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी. साथ ही, अड्डे पर तैनात कर्मियों के लिए आवास और अन्य सुविधाओं का विस्तार भी होगा. कारवार नौसैनिक अड्डे पर परिवारों सहित लगभग 10,000 वर्दीधारी और नागरिक कर्मियों के रहने की योजना है. इससे कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की भी उम्मीद है. परियोजना से स्थानीय उद्योगों और पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है. निर्माण और उससे जुड़ी गतिविधियों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
नौसेना के मुताबिक प्रोजेक्ट सीबर्ड में आत्मनिर्भर India पर भी जोर दिया गया है. परियोजना के लिए 90 प्रतिशत से अधिक सामग्री और उपकरण घरेलू स्रोतों से जुटाए जा रहे हैं. वहीं निर्माण में पर्यावरण संबंधी निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा है. परियोजना पूरी होने पर इसे भारतीय हरित भवन परिषद की स्वर्ण श्रेणी की मान्यता दिलाने का लक्ष्य है.
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जीसीबी/डीकेपी
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