
उलानबटार, 23 अगस्त . पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव Sunday को उलानबटार पहुंचे, जहां वे संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम कन्वेंशन (यूएनसीसीडी) के ‘कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज’ (सीओपी) के 17वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए गए हैं.
भूपेंद्र यादव ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आज मैं संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम कन्वेंशन (यूएनसीसीडी) की चल रही सीओपी17 में हिस्सा लेने के लिए मंगोलिया की राजधानी उलानबटार पहुंचा. अगले कुछ दिनों में मैं अलग-अलग मंचों और द्विपक्षीय बैठकों में जमीन के खराब होने की समस्या को रोकने (लैंड डिग्रेडेशन न्यूट्रैलिटी) और पर्यावरण को फिर से बेहतर बनाने (इको-रिस्टोरेशन) के एजेंडे और इससे जुड़े मुद्दों पर India का पक्ष रखूंगा.”
मंगोलिया में India के राजदूत अतुल मल्हारी गोत्सर्वे और मंगोलिया के President के विदेश नीति सलाहकार ई. ओडबयार ने मंत्री का स्वागत किया.
मंगोलिया में भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर लिखा, “23 अगस्त को मंगोलिया में India के राजदूत अतुल मल्हारी गोत्सर्वे और मंगोलिया के President के विदेश नीति सलाहकार डॉ. ई. ओडबयार ने India के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव का स्वागत किया. वे मंगोलिया में यूएनसीसीडी सीओपी 17 के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं.”
इससे पहले अगस्त में, राजदूत ने रेजिडेंट डिप्लोमैटिक कॉर्प्स के साथ यूएनसीसीडी सीओपी17 के आयोजन स्थल का दौरा किया था.
यूएनसीसीडी की कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज (सीओपी17) का 17वां सत्र मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में 17 से 28 अगस्त तक ‘जमीन को बहाल करना, उम्मीद जगाना’ थीम के तहत आयोजित किया जाएगा.
यूएनसीसीडी के अनुसार, सीओपी17 में यूएनसीसीडी के 197 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ Government, व्यापार और नागरिक समाज के नेताओं, वैज्ञानिकों, युवाओं, मूल निवासियों, पशुपालकों और छोटे किसानों के शामिल होने की उम्मीद है.
वे मरुस्थलीकरण, जमीन के खराब होने और सूखे जैसी आपस में जुड़ी चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए एक साथ आएंगे. वे यह भी समझेंगे कि कमजोर इलाकों में अस्थिरता कम करने, लोगों को विस्थापित होने से रोकने और मानवीय व राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जमीन को बहाल करना जरूरी है.
सीओपी17 संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित और मंगोलिया द्वारा समर्थित ‘संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय चारागाह और पशुपालक वर्ष’ (आईवाईआरपी 2026) के दौरान आयोजित हो रहा है.
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एससीएच/डीकेपी
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