सीएम योगी बोले- पारदर्शी भर्ती से ही बनती है संस्थान की पहचान

Lucknow, 13 सितंबर . डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, Lucknow के स्थापना दिवस समारोह में Chief Minister योगी आदित्यनाथ ने संस्थान के सफर, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर बात की. इस मौके पर उन्होंने 2017 से पहले और बाद की स्थितियों की तुलना करते हुए अपनी Government की उपलब्धियां गिनाईं.

सीएम योगी ने कहा, “साल 2017 में हम सबके सामने यह सवाल था कि क्या यह एक सामान्य अस्पताल बना रहेगा या इसे एक संस्थान में बदल दिया जाएगा. उस समय अनिश्चितता और आपसी मतभेद का माहौल था. तब यह तय किया गया कि इसे एक संस्थान में बदला जाएगा. जो लोग संस्थान में शामिल होना चाहते थे, उन्हें इसमें शामिल किया जाएगा, जबकि जो लोग कहीं और जाना चाहते थे, उन्हें स्वास्थ्य विभाग या दूसरे अस्पतालों में ट्रांसफर किया जा सकता था.”

उन्होंने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर देते हुए कहा कि एक गलत भर्ती पूरे संस्थान की साख पर सवाल खड़ा कर देती है. सीएम योगी ने कहा, “भर्ती प्रक्रिया जितनी पारदर्शी होगी, नतीजे हमारे लिए उतने ही फायदेमंद होंगे. अगर हम अच्छे लोगों को चुनने में नाकाम रहते हैं, अगर चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी होती है, भेदभाव होता है, पारदर्शिता या ईमानदारी की कमी होती है, तो पूरे संस्थान को उसकी ईमानदारी और पारदर्शिता की जीवन भर कीमत चुकानी पड़ती है. गलती एक व्यक्ति करता है, लेकिन कीमत संस्थान को चुकानी पड़ती है.”

अपनी Government के कार्यकाल में हुई भर्तियों का जिक्र करते हुए Chief Minister ने कहा, “पिछले 9 से 9.5 सालों में Government ने उत्तर प्रदेश में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं. 9.5 लाख एक बहुत बड़ी संख्या है. कोई भी व्यक्ति यह दावा नहीं कर सकता कि उनकी भर्ती में कोई भेदभाव हुआ था. कोई यह नहीं कह सकता कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह का भ्रष्टाचार या पैसों का लेन-देन हुआ था.”

आरएमएल संस्थान की भौगोलिक अहमियत बताते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “Lucknow में आरएमएल की लोकेशन ऐसी है कि जब भी पूर्वी उत्तर प्रदेश से कोई पहली बार इलाज के लिए आता है तो वह सबसे पहले इसी संस्थान में पहुंचता है. पहले यहां बड़ी संख्या में ऐसे मरीज आते थे जिन्हें रेगुलर डायलिसिस की जरूरत होती थी. आज यहां सुविधाएं कई गुना बढ़ गई हैं.”

उन्होंने उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों के विस्तार को लेकर अपने सांसद कार्यकाल का अनुभव भी साझा किया. सीएम ने कहा, “2017 से पहले मैं गोरखपुर से सांसद था. एक सांसद के तौर पर मैंने अक्सर यह मांग उठाई थी कि उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़नी चाहिए, लेकिन उनकी संख्या नहीं बढ़ रही थी. हमने India Government को एक प्रस्ताव भेजा था, और जब Narendra Modi देश के Prime Minister बने तो हमने उनके सामने भी यह प्रस्ताव रखा.”

सीएम योगी ने बताया कि पीएम मोदी ने इस मांग को गंभीरता से लिया और पहले चरण में उत्तर प्रदेश के लिए 17 मेडिकल कॉलेज और गोरखपुर के लिए एक एम्स को मंजूरी दी थी. आज उत्तर प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है, जिसका सीधा लाभ आम जनता को मिल रहा है.

एससीएच/डीकेपी