
New Delhi, 1 नवंबर . ‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ (सीएक्यूएम) की एक उच्च-स्तरीय टीम ने पंजाब के संगरूर, पटियाला और मलेरकोटला जिलों में धान की पराली के प्रबंधन के उपायों की समीक्षा की. अधिकारियों ने संबंधित विभागों से कहा कि वे पराली जलाने की घटनाओं पर कड़ी निगरानी रखें और इन्हें रोकने के लिए मिलकर प्रयास जारी रखें.
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि सीएक्यूएम की टीम ने अधिकारियों को सलाह दी कि वे अपनी कार्ययोजनाओं में किए वादों के अनुसार धान की पराली के प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित करें. साथ ही, जमीनी स्तर पर की जाने वाली कार्रवाई तय लक्ष्यों के अनुरूप होनी चाहिए.
बैठक में जिला प्रशासन की ओर से धान की पराली के प्रबंधन की तैयारियों और पराली जलाने की घटनाओं को नियंत्रित करने के उपायों की समीक्षा की गई. टीम ने मलेरकोटला के धुरी रोड पर स्थित ‘एक्स-सिटू’ पराली उपयोग केंद्र का दौरा किया. यह एक डुप्लेक्स बोर्ड और पेपर बनाने वाली इकाई है, जो अपने 20 टीपीएफ क्षमता वाले बॉयलर में ईंधन के रूप में धान की पराली का इस्तेमाल करती है.
उद्योग के प्रतिनिधियों ने बताया कि उनके बॉयलर फर्नेस में सालाना लगभग 17,000 मीट्रिक टन धान की पराली का उपयोग किया जाएगा.
टीम ने मलेरकोटला जिले के अहमदबाद गांव में ‘इन-सिटू’ पराली प्रबंधन मशीनों को काम करते हुए भी देखा. कृषि विभाग ने ‘सुपर सीडर’ मशीन के काम करने का तरीका भी दिखाया. इसके अलावा, टीम ने किसानों से मुलाकात की, जिन्होंने भरोसा दिलाया कि वे पराली नहीं जलाएंगे और ‘इन-सिटू’ मशीनों का इस्तेमाल करके उसका प्रबंधन करेंगे.
टीम ने मौजूदा कटाई के मौसम के दौरान धान की पराली के प्रभावी प्रबंधन और पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से किए जा रहे इंतजामों और उपायों की भी समीक्षा की.
सीएक्यूएम टीम ने संगरूर जिले की भवानीगढ़ तहसील के विभिन्न गांवों का दौरा किया.
टीम ने ‘हॉटस्पॉट’ गांव घराचों के किसानों से बातचीत भी की. सीएक्यूएम टीम को जिला प्रशासन की तैयारियों और धान के पराली के इन-सीटू (मौके पर ही) प्रबंधन के लिए किसानों को ‘क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट’ (सीआरएम) मशीनरी उपलब्ध कराने की व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी दी गई. वहीं, किसानों ने मशीनरी के इस्तेमाल में आ रही दिक्कतों के बारे में बताया.
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डीसीएच/
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