सीएआरए ने पुणे वर्कशॉप में खास जरूरतों वाले बच्चों को गोद लेने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत किया

पुणे, 3 सितंबर . India Government के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स एथॉरिटी (सीएआरए) ने Thursday को पुणे, Maharashtra में वेस्टर्न जोन के लिए अपनी चौथी क्षेत्रीय कंसल्टेटिव वर्कशॉप का सफलतापूर्वक आयोजन किया. यह वर्कशॉप Maharashtra Government और स्टेट एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी (एसएआरए), Maharashtra के सहयोग से पुणे, Maharashtra में आयोजित की गई थी.

यह वर्कशॉप सीएआरए के ‘गोद लेने के बारे में जागरूकता अभियान 2025’ के तहत लगातार की जा रही कोशिशों का हिस्सा थी. इस अभियान का विषय था – ‘खास जरूरतों वाले बच्चों (दिव्यांग बच्चों) के लिए गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देना’. इस अभियान का मकसद परिवार-आधारित देखभाल और गोद लेने की प्रक्रिया को बढ़ावा देना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि खास जरूरतों वाले बच्चों को सुरक्षित, प्यार भरे और सहयोगी पारिवारिक माहौल में आगे बढ़ने और फलने-फूलने के मौके मिलें.

वेस्टर्न जोन, जिसमें Maharashtra, Gujarat, गोवा और दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव का केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं, का भौगोलिक और प्रशासनिक दायरा बहुत बड़ा है. इस बड़े दायरे को देखते हुए, इस वर्कशॉप में 74 से ज़्यादा ज़िलों के 150 स्टेकहोल्डर्स ने हिस्सा लिया. इसने गोद लेने और बच्चों के पुनर्वास के मामलों पर क्षेत्रीय बातचीत, जानकारी साझा करने और तालमेल बिठाने के लिए एक अहम मंच प्रदान किया.

Maharashtra Government में महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति वर्दा सुनील तटकरे ने वीडियो संदेश के जरिए हिस्सा लेने वाले स्टेकहोल्डर्स को संबोधित किया. उन्होंने सभी स्टेकहोल्डर्स को गोद लेने की व्यवस्था को मजबूत करने और विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए स्थायी, प्यार भरा और सहयोगी पारिवारिक माहौल पाने के बेहतर अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने परिवार-आधारित देखभाल और दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण पुनर्वास के काम को आगे बढ़ाने के लिए सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच लगातार सहयोग, जागरूकता और समन्वित प्रयासों के महत्व पर जोर दिया.

सभा को संबोधित करते हुए, सीएआरए की सीईओ और सदस्य सचिव भावना सक्सेना ने विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए लगातार और मिलकर प्रयास करने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि सीएआरए की आउटरीच और सलाह-मशविरे वाली पहलों ने गोद लेने की व्यवस्था को मज़बूत करने में योगदान दिया है. उन्होंने विशेष जरूरतों वाले बच्चों को स्थायी पारिवारिक देखभाल मिलने के मौकों को और बढ़ाने के लिए जोरदार और समन्वित प्रयास जारी रखने के महत्व पर जोर दिया.

एमएस/