सीईसी को देना चाहिए इस्तीफा, आपराधिक कार्रवाई का सामना करें : प्रियंका गांधी वाड्रा

New Delhi/वायनाड, 24 सितंबर . ईसीआई-एसआईआर विवाद को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि यदि चुनावों में धांधली और मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से जुड़े आरोप सही साबित होते हैं और इसकी जानकारी होने के बावजूद अधिकारी इसमें शामिल रहे, तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए और आपराधिक कार्रवाई का सामना करना चाहिए.

वायनाड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि सामने आईं सभी बातें सही हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनावों में कथित धांधली की जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने इसमें भागीदारी की, तो उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए. यदि अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने भी स्थिति ठीक नहीं होने की बात कही थी और इसके बावजूद धांधली जारी रही, तो मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है.

प्रियंका गांधी ने कहा कि मतदाता सूची से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं. ये लोकतंत्र और देश के लिए गंभीर खतरा है. जिस तरह से चुनाव आयोग काम कर रहा है, वह देश के लिए सही नहीं है, ये बात अब सबके सामने भी आ गई है.

उन्होंने कहा कि चुनाव में धोखाधड़ी से बड़ा देश और संविधान पर कोई हमला नहीं हो सकता. प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि यदि इस तरह की कार्रवाई संस्थागत स्तर पर की जा रही है और इसके पीछे किसी Political दल का उद्देश्य है, तो यह “देशद्रोह से कम नहीं” है. ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों को कानूनी सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए.

उधर, Maharashtra के ठाणे में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता जितेंद्र आव्हाड ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके सदस्यों के बीच कथित मतभेदों को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि मुद्दा केवल मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तक सीमित नहीं है.

आव्हाड ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि पहले Supreme Court के एक फैसले में मुख्य न्यायाधीश, Prime Minister और विपक्ष के नेता वाली समिति की बात कही गई थी. उनके मुताबिक, केंद्र Government ने 2024 के Lok Sabha चुनाव से पहले कानून में बदलाव किया.

आव्हाड ने ज्ञानेश कुमार पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन पर एक Political दल के पक्ष में खड़े होने का आरोप लगाया. उन्होंने इसे संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों और संविधान का अपमान बताया.

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