सिर्फ महाराष्ट्र में नहीं, इन छह राज्यों में भी गणेश चतुर्थी की धूम, जानिए कहां कैसे मनाते हैं त्योहार

New Delhi, 12 सितंबर . भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गजानन का आगमन बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. हालांकि, यह त्योहार पूरे India में मनाया जाता है, लेकिन हर राज्य में इसे मनाने का तरीका अलग-अलग है. कहीं इसे 10 दिनों तक सार्वजनिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है तो कहीं परिवार के साथ पूजा की जाती है.

Maharashtra में इस त्योहार की धूम अलग ही अंदाज में देखने को मिलती है, तो दक्षिण India में इसे मां गौरी और गणेश भगवान के पवित्र रिश्ते के रूप में देखा जाता है. गोवा में मिट्टी के गणपति और पारंपरिक व्यंजनों के साथ त्योहार मनाते हैं, तो बंगाल और उत्तर India में इसका नजारा कुछ अलग ही देखने को मिलता है.

Maharashtra :- यहां पर गणेशोत्सव सांस्कृतिक त्योहार के रूप में मनाया जाता है. यह पर्व यहां के लोगों के लिए सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक आत्मा का प्रतीक है. प्रदेश का मुख्य आकर्षण Mumbai के विश्व प्रसिद्ध लालबागचा राजा और विशाल पंडालों में सजी भगवान गणेश की भव्य प्रतिमाएं हैं. लालबागचा राजा को ‘नवसाचा गणपति’ (मनोकामना पूरी करने वाला) कहा जाता है, जिनके दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों भक्त आते हैं. बप्पा को अर्पित किए जाने वाले विशेष नारियल और गुड़ से बने उकडीचे मोदक इस उत्सव का खास स्वाद और आकर्षण हैं.

गोवा :- गणेश चतुर्थी को स्थानीय भाषा में ‘चवथ’ कहा जाता है. यहां प्राकृतिक चीजों, फलों और सब्जियों से ‘माटोली’ सजाने की अनोखी परंपरा है. नदी की मिट्टी से बनी गणेश जी की पारंपरिक मूर्तियां घर लाई जाती हैं, जिसके ऊपर जंगली फलों, सब्जियों और औषधीय पौधों की एक अनूठी और सुंदर छत बनाई जाती है, जिसे ‘माटोली’ कहते हैं. यह प्रकृति के प्रति गोवा के प्रेम को दर्शाता है. पूरे उत्सव के दौरान भगवान गणेश के साथ-साथ माता गौरी (पार्वती) और भगवान शिव की भी पूजा की जाती है. पहला दिन (जिसे ‘ताय’ कहा जाता है) माता गौरी को समर्पित होता है. उत्सव डेढ़, पांच, सात या नौ दिनों तक चलता है. सातवें दिन कुछ गांवों (जैसे कुम्भारजुआ) में सजी हुई नावों की एक अनोखी झांकी निकाली जाती है. इस त्योहार की सबसे खास मानसूनी मिठाई को चावल के आटे में गुड़ और नारियल भरकर हल्दी के पत्तों में भाप से पकाया जाता है.

कर्नाटक :- गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले गौरी हब्बु (माता गौरी की पूजा) की जाती है. फिर दूसरे दिन से Bengaluru और हुबली जैसे शहरों में सार्वजनिक पंडालों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन और भव्य स्तर पर महागणपति की पूजा होती है. नियमों और परंपरा के अनुसार डेढ़, तीन, पांच या सात दिनों के बाद पूरे हर्षोल्लास के साथ गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है.

आंध्र प्रदेश :- गणेश चतुर्थी पर लोग अपने घरों में मिट्टी या हल्दी से बनी भगवान गणेश की छोटी प्रतिमा स्थापित करते हैं. कई जगहों पर विशेष रूप से मैटी विनायकुडु (मिट्टी के गणेश) की पूजा का विधान है. चित्तूर जिले में स्थित प्रसिद्ध वरसिद्धि विनायक स्वामी मंदिर में इस अवसर पर 21 दिनों तक वार्षिक ब्रह्मोत्सव मनाया जाता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं.

तमिलनाडु :- तमिलनाडु में गणेश चतुर्थी को ‘विनायक चतुरथाई’ या ‘पिल्लैयार चतुरथाई’ के नाम से जाना जाता है. तमिल संस्कृति में भगवान गणेश को ‘पिल्लैयार’ कहा जाता है. यहां उन्हें आम तौर पर एक ब्रह्मचारी देवता के रूप में पूजा जाता है, जो उत्तर India या अन्य राज्यों की तरह अपनी पत्नियों (सिद्धि और सिद्धि) के साथ नहीं, बल्कि अकेले पूजे जाते हैं. इस त्योहार का सबसे खास पकवान कोझुकट्टई है, जो मोदक का ही दक्षिण भारतीय तमिल रूप है.

बिहार :- यहां गणेश चतुर्थी के दिन चौरचन (चौर चतुरथी) पर्व मनाया जाता है. महिलाएं संतान की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं तथा आंगन में सुंदर अरिपन बनाकर चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं.

एनएस/एबीएम