सिर्फ इंसानों की सेहत नहीं, जानवरों और प्रकृति का स्वस्थ रहना भी जरूरी : डब्ल्यूएचओ

New Delhi, 3 नवंबर . अक्सर जब हम सेहत की बात करते हैं तो हमारा ध्यान सिर्फ इंसानों की बीमारियों, खानपान और इलाज तक सीमित रहता है. हम अपनी सेहत का ख्याल रखने के लिए अच्छी डाइट लेते हैं, नियमित व्यायाम करते हैं और समय-समय पर डॉक्टर से सलाह भी लेते हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि हमारी सेहत का रिश्ता सिर्फ हमारे रहन-सहन और खानपान से नहीं, बल्कि जानवरों और आसपास के पर्यावरण से भी जुड़ा हुआ है?

दरअसल, इंसान, जानवर और प्रकृति एक-दूसरे पर निर्भर हैं. अगर इनमें से किसी एक का स्वास्थ्य बिगड़ता है तो उसका असर बाकी सभी पर भी पड़ सकता है. इसी सोच को दुनिया के सामने रखने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ‘वन हेल्थ’ यानी एक स्वास्थ्य की अवधारणा पर जोर देता है.

डब्ल्यूएचओ ने आज ‘वन हेल्थ डे’ पर social media प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि ‘वन हेल्थ’ एक ऐसा एकीकृत नजरिया है, जिसका उद्देश्य इंसानों, जानवरों और पर्यावरण के स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाना और उसे लंबे समय तक बनाए रखना है.

इसका मतलब है कि अगर हमें एक स्वस्थ दुनिया बनानी है तो केवल इंसानों की सेहत पर ध्यान देना काफी नहीं होगा. हमें पालतू और जंगली जानवरों, पेड़-पौधों, पानी, हवा और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत का भी ख्याल रखना होगा.

हमारे आसपास मौजूद हर चीज किसी न किसी तरह से हमारी जिंदगी को प्रभावित करती है. उदाहरण के लिए, अगर पीने का पानी दूषित हो जाता है तो इससे इंसानों के साथ-साथ जानवरों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है. इसी तरह हवा में बढ़ता प्रदूषण सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है. जंगलों की कटाई और प्राकृतिक आवासों के नष्ट होने से जंगली जानवरों का जीवन प्रभावित होता है. इससे इंसानों और जानवरों के बीच टकराव बढ़ सकता है, जो कुछ संक्रामक बीमारियों के फैलने का कारण बन सकता है. इसलिए इन सभी पहलुओं को अलग-अलग देखने के बजाय एक साथ समझना जरूरी है.

वन हेल्थ की अवधारणा सिर्फ पर्यावरण को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में भी मददगार है. आज दुनिया के सामने नई संक्रामक बीमारियों का उभरना, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी दवाओं के खिलाफ बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्मजीवों का प्रतिरोध बढ़ना और खाद्य सुरक्षा जैसी कई चुनौतियां हैं. इन समस्याओं का समाधान तभी बेहतर तरीके से निकाला जा सकता है, जब स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ पशु चिकित्सक, पर्यावरण विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और सरकारी विभाग मिलकर काम करें.

उदाहरण के तौर पर, जानवरों में किसी बीमारी के लक्षण समय रहते पहचान लिए जाएं तो उसके इंसानों तक पहुंचने के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है. इसी तरह खाने-पीने की चीजों की साफ-सफाई और सुरक्षा पर ध्यान देकर कई बीमारियों से बचा जा सकता है.

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, वन हेल्थ का नजरिया स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर तक अपनाया जा सकता है. इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों के बीच बेहतर संवाद, सहयोग और तालमेल जरूरी है.

–

पीआईएम/एबीएम