सितारा देवी: कथक को नई पहचान देने वाली महान नृत्यांगना, जिनके घुंघरुओं पर थिरकता था पूरा हिंदुस्तान

Mumbai , 7 नवंबर . भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली ‘कथक’ को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने वाली महान कलाकारों में से एक सितारा देवी, जिन्हें लोग ‘कथक की रानी’ कहते थे, का जन्म 8 नवंबर 1920 को कोलकाता के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था.

सितारा देवी का असल नाम धनलक्ष्मी था. घर में लोग उन्हें प्यार से धन्नो भी कहकर बुलाया करते थे. सितारा को बचपन से ही नृत्य में काफी रुचि थी. उनके पिता सुकदेव महाराज एक संस्कृत विद्वान और कथक गुरु थे तथा मां मथुरा देवी पारंपरिक नृत्य की जानकार थी. उस जमाने में जब अच्छे घर की लड़कियां नाचना तो दूर, उसका नाम लेना भी पाप समझती थीं, सितारा ने मात्र 10 वर्ष की उम्र में पहला पेशेवर प्रदर्शन किया.

सितारा ने नृत्य की प्रारंभिक प्रशिक्षण अपने पिता से प्राप्त की. वह 12 वर्ष की उम्र तक Mumbai आ चुकी थीं और 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने ‘नागिन’ फिल्म में पहली बार परदे पर नृत्य किया. जिस उम्र में आमतौर पर बच्चे जीवन के बारे में जान और समझ रहे होते हैं, सितारा जब केवल 16 वर्ष की थीं, तब रवींद्रनाथ टैगोर ने उनका नृत्य देखकर उन्हें ‘नृत्य सम्राज्ञी’ की उपाधि दी थी.

सितारा के लिए नृत्य एक साधना थी. उन्होंने 94 वर्ष की उम्र तक मंच पर घुंघरू बांधे और कभी भी अपनी कला को नहीं छोड़ा. सितारा ने अपने करियर में 100 से ज्यादा फिल्मों में नृत्य किया. ‘शहर का जादू’, ‘आवारा’, ‘मदर इंडिया’, ‘अनजाना’, ‘मदर इंडिया’ और ‘हरे राम हरे कृष्ण’ जैसी फिल्मों में उनके नृत्य आज भी देखे और सराहे जाते हैं.

सितारा की जिंदगी जितनी रंगीन थी, उतनी ही बेबाक. रिपोट्स के मुताबिक, उन्होंने चार शादियां की थीं. उनकी पहली शादी बचपन में महज 8 वर्ष की आयु में श्री देसाई से हुई थी, जिसे बाद में उन्होंने खुद तोड़ दिया था. दूसरी शादी उन्होंने Actor नजीर अहमद खान से की, इसके लिए उन्होंने इस्लाम धर्म अपनाया था, लेकिन बाद में दोनों का तलाक हो गया. इसके बाद उन्होंने फिल्म निर्देशक-निर्माता के. आसिफ से विवाह किया, लेकिन यह भी ज्यादा समय तक नहीं चला और दोनों का तलाक हो गया. वहीं, चौथी शादी उन्होंने Gujaratी व्यवसायी प्रताप बारोट से की.

भारतीय शास्त्रीय नृत्य और कला के क्षेत्र में अमूल्य योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिनमें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, पद्मश्री और कालिदास सम्मान शामिल हैं. हालांकि, India Government द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने के दौरान, उन्होंने यह कहते हुए लेने से इनकार कर दिया था कि उनका योगदान इससे भी बड़ा है और उन्होंने ‘India रत्न’ की मांग की थी.

94 वर्ष की उम्र में भी सितारा मंच पर लगातार 45 मिनट तक नृत्य करती थीं. उनकी आखिरी प्रस्तुति 2013 में Mumbai में हुई थी. 25 नवंबर 2014 को 94 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा गूंजता रहेगा, ठीक उसी तरह, जैसे उनके घुंघरुओं की आवाज गूंजती थी.

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डीके/डीकेपी