
Mumbai , 18 सितंबर . भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने Friday को कहा कि इंडिया डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉरपोरेशन (आईडीपीआईसी) फिलहाल 8 बैंकों के साथ पायलट आधार पर संचालित हो रहा है और आरबीआई इसके व्यापक क्रियान्वयन की प्रक्रिया को तेज करने पर काम कर रहा है.
Mumbai में एक कार्यक्रम के दौरान से बातचीत में मुर्मू ने कहा, “यह पहले से ही 8 बैंकों में पायलट आधार पर चल रहा है. हम इसे तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.”
Government और आरबीआई पिछले कुछ समय से डिजिटल भुगतान प्रणाली की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और नागरिकों को साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए कई कदम उठा रहे हैं.
आरबीआई के परामर्श से स्थापित किए जा रहे आईडीपीआईसी का उद्देश्य ऐसा तंत्र विकसित करना है, जिसके जरिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच रियल-टाइम फ्रॉड इंटेलिजेंस और चेतावनियां साझा की जा सकें. इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल) और बिग डेटा एनालिटिक्स जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा.
मुर्मू ने पेमेंट सिस्टम में आ रहे बदलावों और नकदी तथा डिजिटल पेमेंट के सह-अस्तित्व पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान में तेज वृद्धि के बावजूद नकदी का महत्व पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है.
उन्होंने कहा कि ट्रांजैक्शन के माध्यम के रूप में नकदी का इस्तेमाल धीरे-धीरे डिजिटल माध्यमों से प्रतिस्थापित हो रहा है, लेकिन मूल्य संचय (स्टोर ऑफ वैल्यू) के रूप में नकदी की भूमिका अभी भी बनी हुई है और इसमें कोई बड़ी गिरावट नहीं देखी गई है.
मुर्मू ने कहा, “हम प्रचलन में मौजूद नकदी को देखते हैं. जब डिजिटल ट्रांजैक्शन बढ़ते हैं, तो उसी अनुपात में नकदी कम होनी चाहिए, लेकिन हम ऐसा बहुत अधिक नहीं देख रहे हैं.”
उन्होंने बताया कि घरों और व्यक्तियों के पास मौजूद नकदी की मात्रा देश की आर्थिक स्थिति से भी जुड़ी होती है. हालांकि अर्थव्यवस्था में बढ़ती औपचारिकता (फॉर्मलाइजेशन) डिजिटल पेमेंट को तेजी से बढ़ावा दे रही है.
उन्होंने कहा, “अर्थव्यवस्था में लगातार औपचारिकता बढ़ रही है. इसलिए हमें दिशा के लिहाज से काफी उम्मीद है. डिजिटल भुगतान बहुत अच्छी तरह आगे बढ़ रहा है.”
नियामकीय बदलावों की रफ्तार पर बात करते हुए मुर्मू ने कहा कि पिछले एक वर्ष में आरबीआई ने 600 से अधिक मसौदा और अंतिम संशोधन सर्कुलर जारी किए हैं.
उन्होंने बताया कि केंद्रीय बैंक ने विनियमित संस्थाओं को लगभग 11 अलग-अलग श्रेणियों में पुनर्वर्गीकृत किया है. इसके कारण कई सर्कुलरों को विभिन्न श्रेणियों के अनुरूप अलग-अलग रूप में जारी करना पड़ा, जिससे उनकी संख्या अधिक दिखाई देती है.
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डीबीपी
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