सहारनपुर में अवैध मस्जिद हटाने के बाद मिले कुएं की अखाड़ा परिषद ने जांच की मांग की

हर‍िद्वार, 6 सितंबर . अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने सहारनपुर में मस्जिद को गिराए जाने वाले स्‍थान पर मिले 20 फुट गहरे कुएं की जांच की मांग की है. उन्‍होंने कहा कि इस बात की जांच की जानी चाहिए कि कहीं हिंदू धर्म स्थलों को नष्‍ट कर मस्जिद का निर्माण न किया गया हो. इसके साथ ही संत समाज ने मस्जिद गिराए जाने के फैसले का स्‍वागत किया है.

दरअसल,सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी अवैध मस्जिद को तोड़ने के बाद उसके बीच में एक गहरा कुआं मिला है. फिलहाल, Police-प्रशासन मौके पर मौजूद है और मस्जिद के बीच मिले कुएं को ढक दिया गया है.

रवींद्र पुरी ने समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान कहा कि सहारनपुर प्रकरण पहले से न्‍यायालय में विचाराधीन था. मस्जिद की जमीन सरकारी थी. अच्‍छा होता कि पहले ही मस्जिद को स्‍थानान्‍तर‍ित कर दिया गया होता. जिला जज के माध्‍यम से मस्जिद को गिराने का आदेश दिया गया था. मस्जिद का अवैध रूप से निर्माण किया गया था और उसमें अनुचित गतिविधियां चल रही थी. मेरी मुसलमान समुदाय के लोगों से अपील है कि मस्जिद को गिराए जाने के मामले को लेकर किसी तरह से तनाव बढ़ाने की आवश्‍यकता नहीं है. मस्जिद का निर्माण किसी अन्‍य स्‍थान पर करें और इसमें हिंदू समाज भी सहयोग करेगा.

उन्‍होंने कहा कि उस स्‍थान पर कुआं निकला है, जिसकी जांच पुरातत्‍व विभाग को करनी चाहिए. हिंदू समाज में अग्नि,जल,वायु,आकाश और पृथ्वी की पूजा की जाती है. शादी-विवाह और बच्‍चों के उपनयन संस्‍कार जैसे कई आयोजनों में कुंए का पूजन किया जाता है. अगर उस स्‍थान पर किसी देव प्रतिमा का विग्रह निकला है तो कुएं की सफाई कराकर उसकी जांच करनी चाहिए. Government को इस बात की जांच करनी चाहिए कि कहीं ऐसा न हो कि हिंदू धर्म स्‍थलों को नष्‍ट कर मस्जिद का निर्माण किया गया हो.

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय सचिव महामंडलेश्वर ईश्वर दास महाराज ने सहारनपुर मस्जिद गिराए जाने का समर्थन किया है. उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि कथित तौर पर मंदिरों की जगह मस्जिदें बनाई गई थीं और मुसलमानों से अपील की कि वे सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए इन तथ्यों को स्वीकार करें.

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय सचिव महामंडलेश्वर ईश्वर दास महाराज ने कहा, “यह कोई हैरानी वाली घटना नहीं है. आपने अभी खुद ही देखा है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण राम मंदिर है. आप दिल्ली में कुतुब मीनार और ताजमहल को भी देख सकते हैं. वहां भी हमारे तेजो महालय, जो भगवान शंकर का मंदिर था, को तोड़कर उसके ऊपर निर्माण किया गया था. सहारनपुर की घटना हमारे लिए हैरानी वाली नहीं है; हमारा मानना ​​है कि यह बिल्कुल सच है. अगर लोग हर जगह ऐसी मांगें उठाएं, तो ऐसे कई उदाहरण मिल सकते हैं.”

उन्‍होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने तत्‍काल कार्रवाई का आदेश दिया. मुसलमान समुदाय के लोगों को सत्‍य को स्‍वीकार करना चाहिए. मुसलमानों को इस बात पर खेद प्रकट करते हुए कहना चाहिए कि उनके पूर्वजों से गलती हुई है. इससे सद्भावना बढ़ेगी और आक्रोशित होने की जरूरत नहीं है. उत्तर प्रदेश में ऐसे कई स्‍थान मिल जाएंगे, जहां पर प्राचीन मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाए गए.

अखिल भारतीय संत समिति ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी गोपालचार्य महाराज ने सहारनपुर मस्जिद गिराए जाने के मामले में प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन किया है. उन्होंने दावा किया कि उस जगह पर पहले हिंदू धार्मिक ढांचे मौजूद थे.

स्वामी गोपालचार्य महाराज ने कहा, “समझने वाली अहम बात यह है कि सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि पूरा मुस्लिम समुदाय भी यह जानता है कि जहां आज मस्जिदें हैं, वहां पहले किसी न किसी रूप में हिंदू समाज से जुड़ी जगहें हुआ करती थीं. उस समय की कार्रवाई के दौरान उन हिंदू जगहों चाहे वे मंदिर हों, मठ हों या आश्रम को तोड़ दिया गया था. यही वजह है कि आज हमें अलग-अलग जगहों पर कई मस्जिदें दिखाई देती हैं.”

उन्‍होंने कहा कि सहारनपुर में प्रशासन के द्वारा की गई कार्रवाई स्‍वागतयोग्‍य है. जिला प्रशासन की तत्‍पर कार्रवाई का फैसला भी सराहनीय है. पूर्व की Governmentें इस प्रकार के प्रकरण से खुद को दूरी बनाती रही हैं. इसकी वजह से हिंदू समाज में रोष व्‍याप्‍त है.

एएसएच/पीएम