
New Delhi, 3 नवंबर Government सभी निवेशक श्रेणियों के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर को समाप्त कर सकती है और इसके बावजूद राजकोषीय समेकन के रोडमैप पर इसका बहुत अधिक असर नहीं पड़ेगा. यह जानकारी Tuesday को जारी रिपोर्ट में दी गई.
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, एलटीसीजी टैक्स खत्म करने से Government के राजस्व में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के करीब 0.1-0.2 प्रतिशत के बराबर कमी आएगी. इससे वित्त वर्ष 2027-28 में Government को होने वाला राजस्व नुकसान 40,000-50,000 करोड़ रुपए तक सीमित रहने की संभावना है.
साथ ही कहा कि राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों को मोटे तौर पर तय दायरे में रखते हुए इस नुकसान को सहन किया जा सकता है.
रिपोर्ट में कहा गया है, “हमारा मानना है कि यदि सैद्धांतिक रूप से सभी पूंजीगत लाभ कर समाप्त कर दिए जाएं, तो भी Government इस वित्तीय झटके को सहन करने में सक्षम होगी.”
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2025-26 में एलटीसीजी टैक्स संग्रह करीब एक लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 में इसके घटकर 40,000-50,000 करोड़ रुपए रहने की संभावना जताई गई है.
वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 1.3 लाख करोड़ रुपए का संग्रह असाधारण बाजार परिस्थितियों को दर्शाता है. इससे पिछले वर्ष भारतीय शेयर बाजारों ने करीब 30 प्रतिशत का रिटर्न दिया था, जिसके चलते विदेशी निवेशकों ने मुनाफावसूली की थी.
हालांकि, हालिया बाजार परिस्थितियां इससे काफी अलग हैं. पिछले तीन वर्षों में निफ्टी का औसत रिटर्न महज 0.5 प्रतिशत रहा है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने कुल मिलाकर 4.8 लाख करोड़ रुपए की निकासी की है.
रिपोर्ट में पूंजीगत लाभ कर के व्यापक ढांचे में बदलाव का भी सुझाव दिया गया है. इसमें खुदरा निवेशकों को अधिक राहत देने के लिए सालाना एलटीसीजी टैक्स छूट की सीमा मौजूदा 1.25 लाख रुपए से बढ़ाकर 2 लाख रुपए करने और इसे महंगाई दर से जोड़ने की सिफारिश की गई है.
रिपोर्ट में निवेश की अवधि बढ़ने के साथ टैक्स दरों को कम करने का भी प्रस्ताव दिया गया है. इसके तहत दो से तीन साल तक रखे गए निवेश पर होने वाले लाभ पर 5 प्रतिशत टैक्स लगाया जा सकता है, जबकि तीन साल से अधिक अवधि तक रखी गई संपत्तियों पर एलटीसीजी टैक्स शून्य किया जा सकता है.
वहीं, एक से दो साल तक रखे गए निवेश पर मौजूदा 12.5 प्रतिशत टैक्स दर जारी रखने का सुझाव दिया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार, “टर्म डिपॉजिट को बचतकर्ताओं के बीच अधिक पसंद किया जा रहा है और ऊंची ब्याज दरों के कारण इनमें निवेश का अनुपात बढ़ा है. यदि अलग-अलग परिपक्वता अवधि पर लागू मौजूदा कर व्यवस्था को हटाकर सभी अवधियों के लिए एक समान 15 प्रतिशत टैक्स दर लागू की जाती है, तो Government को करीब 10,500 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हो सकता है. बचत जमा और सावधि जमा दोनों को मिलाकर राजस्व का कुल नुकसान करीब 12,000 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है.”
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एबीएस
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