‘सरकारी मदरसों में भी लागू हो एक जैसी नीति’, सीएम धामी के फैसले पर वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल

New Delhi, 21 अक्टूबर . विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने उत्तराखंड के Chief Minister पुष्कर सिंह धामी के मदरसों में Friday की छुट्टी के मुद्दे पर दिए गए बयान का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि सभी शैक्षणिक संस्थानों में समानता और एकरूपता होनी चाहिए. इसके अलावा, उन्होंने पश्चिम बंगाल के Chief Minister सुवेंदु अधिकारी के India में बांग्लादेश जैसे हालात बनाने की कोशिशों संबंधी आरोपों और दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान प्रतिमा को छूने के अधिकार पर दिए गए बयान पर भी टिप्पणी की.

उत्तराखंड के Chief Minister पुष्कर सिंह धामी के मदरसों में Friday की छुट्टी के संबंध में दिए गए बयान पर विनोद बंसल ने कहा कि सभी संस्थानों को एकरूपता के सिद्धांत पर चलना चाहिए. व्यवस्था में समता और समानता का भाव होना जरूरी है. किसी विशेष समुदाय के शैक्षणिक संस्थानों में अलग दिन छुट्टी होने और बाकी संस्थानों में दूसरे दिन छुट्टी होने का कोई तार्किक आधार नहीं दिखाई देता. सीएम धामी के कदम का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों की Governmentों को भी इस व्यवस्था का पालन करना चाहिए.

उन्होंने विशेष रूप से सरकारी अनुदान प्राप्त मदरसों और सरकारी व्यवस्था के साथ संचालित होने वाले संस्थानों का उल्लेख किया. बंसल ने कहा कि ऐसे संस्थानों में भी Government की ओर से तय की गई नीतियां उसी तरह लागू होनी चाहिए, जैसे अन्य विद्यालयों में होती हैं.

पश्चिम बंगाल के Chief Minister सुवेंदु अधिकारी के इस आरोप पर कि India में बांग्लादेश जैसे हालात बनाने की कोशिश की जा रही है, विनोद बंसल ने सीजेपी, कांग्रेस और कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़े लोगों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश की संप्रभुता और संविधान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. बंसल ने इन समूहों पर देश का माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें आत्मचिंतन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि देश में कांग्रेस और कम्युनिस्ट नहीं होते, तो India की स्थिति आज अलग होती.

पश्चिम बंगाल के Chief Minister सुवेंदु अधिकारी की इस टिप्पणी पर कि दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान केवल सनातन धर्म को मानने वालों को ही प्रतिमा छूनी चाहिए, विनोद बंसल ने धार्मिक आस्था और पूजा-पद्धति का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि जो लोग India माता की जय और वंदे मातरम नहीं बोल सकते, मां के जयकारे नहीं लगा सकते या हिंदू धर्म और उसकी आस्थाओं में विश्वास नहीं करते, उन्हें धार्मिक आयोजनों के माहौल में जाने पर विचार करना चाहिए. धार्मिक आस्था के केंद्रों में आने वाले लोगों को वहां की मान्यताओं और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए.

उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई व्यक्ति ऐसे धार्मिक आयोजन में शामिल होता है, तो उसे श्रद्धा और निष्ठा के साथ मां की आराधना, पूजा और आरती करनी चाहिए. साथ ही, हिंदू मान्यताओं का पालन करना चाहिए. बंसल ने यह भी कहा कि आस्था में विश्वास नहीं रखने वाले लोगों का धार्मिक स्थलों में प्रवेश प्रतिबंधित होना चाहिए.

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