
New Delhi, 25 सितंबर . Prime Minister Narendra Modi ने Friday को सुभाषितम में भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य पंडित दीनदयाल को नमन किया है. इसके साथ ही संस्कृत श्लोक के जरिए पुरुषार्थ से सफलता के बारे में बताया है.
Prime Minister Narendra Modi ने एक्स पोस्ट में कहा, “राष्ट्रसेवा के सच्चे साधक पंडित दीनदयाल उपाध्याय को उनकी जयंती पर सादर नमन. उन्होंने समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को राष्ट्र निर्माण का आधार माना और अंत्योदय की एक ऐसी विचारधारा दी, जिससे आज भी जनकल्याण की अद्भुत प्रेरणा मिलती है. आइए, इस विशेष अवसर पर उनके विचारों और आदर्शों को आत्मसात कर सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने का संकल्प दोहराएं.”
इसके साथ ही Prime Minister ने संस्कृत का श्लोक भी साझा किया, “यथा यथा प्रयत्नः स्याद्भवेदाशु फलं तथा. इति पौरुषमेवास्ति दैवमस्तु तदेव च॥” इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, मनुष्य जितना अधिक पुरुषार्थ और प्रयास करता है, उतनी ही शीघ्र सफलता प्राप्त करता है. इसलिए केवल भाग्य नहीं बल्कि कर्म, साहस और नए विचारों को साकार करने का पुरुषार्थ ही सफलता और नवाचार का मार्ग प्रशस्त करता है.
यह श्लोक प्रसिद्ध हिंदू दार्शनिक ग्रंथ ‘योगवासिष्ठ’ से लिया गया है. यह इस ग्रंथ के द्वितीय प्रकरण (मुमुक्षुव्यवहारप्रकरणम्) के छठे सर्ग का दूसरा श्लोक है.
योगवाशिष्ठ महारामायण संस्कृत सहित्य में अद्वैत वेदान्त का विशाल ग्रन्थ है. परम्परानुसार आदिकवि वाल्मीकि योगवाशिष्ठ महारामायण के रचयिता माने जाते हैं, लेकिन वास्तविक रचयिता वशिष्ठ हैं और महर्षि वाल्मीकि इस सिद्धांत ग्रन्थ के संकलनकर्ता मात्र हैं. योगवाशिष्ठ महारामायण में जगत् की असत्ता और परमात्मसत्ता का विभिन्न दृष्टान्तों के माध्यम से प्रतिपादन है. भारद्वाज के मोक्ष की प्राप्ति के लिए की गई प्रश्नोत्तरी का भी वर्णन है.
इसके पहले पीएम मोदी ने Thursday को सुभाषित में संस्कृत श्लोक, “अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्. स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ्मयं तप उच्यते॥” साझा किया था. जिसका हिंदी अर्थ है कि मनुष्य को सदैव ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जो सत्य, प्रिय और हितकारी हो और किसी के मन में अशांति उत्पन्न न करे. सद्ग्रंथों का निरंतर स्वाध्याय और चिंतन ही वाणी को वास्तविक सार्थकता प्रदान करता है. विचारपूर्वक बोली गई वाणी समाज में शांति, सद्भाव और सकारात्मकता का संचार करती है.
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ओपी/एएस
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