
Mumbai , 5 नवंबर . प्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा ने दीपावली के मौके पर अपने घर में त्योहार मनाने की परंपरा, भगवान राम के प्रति आस्था, संगीत और मनोरंजन जगत से जुड़े हालिया विवादों पर राय रखी. उन्होंने कहा कि दीपावली उनके लिए भगवान राम के वनवास पूरा कर अयोध्या लौटने की खुशी का पर्व है. इस दिन वे अपने घर को सजाते हैं, पटाखे और फुलझड़ियां जलाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और त्योहार का आनंद लेते हैं.
वहीं, दीया मिर्जा से जुड़े विवाद पर उन्होंने सभी धर्मों के त्योहारों का सम्मान करने की अपील की. रामायण पर आधारित फिल्म के संगीत को लेकर एआर रहमान की आलोचना पर उन्होंने कहा कि संगीत के चयन की जिम्मेदारी निर्देशक और निर्माता की होती है, इसलिए रहमान को दोष नहीं देना चाहिए.
जलोटा ने कहा कि दीपावली का त्योहार उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है. भगवान राम जब वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे, तब पूरी अयोध्या प्रसन्न थी. आज भी दीपावली पर वही भाव मन में आते हैं. वे अपने घर को खूब सजाते हैं, पटाखे और फुलझड़ियां जलाकर भगवान राम का स्वागत करते हैं. इसके साथ ही मां लक्ष्मी और मां सरस्वती से प्रार्थना करते हैं कि सभी के जीवन को सुंदर और सुखमय बनाए रखें.
उन्होंने कहा कि बदलाव अच्छा है और हर बदलाव के पीछे कोई न कोई अच्छी बात होती है. पहले दीपावली मनाने का तरीका अलग हो सकता था और आज लोग अपने-अपने ढंग से त्योहार मनाते हैं, लेकिन इसकी मूल भावना वही है. भगवान राम का स्वागत करना और मां लक्ष्मी तथा मां सरस्वती की पूजा करना आज भी इस पर्व का प्रमुख हिस्सा है. लोग आज भी उनसे अक्सर ‘ऐसी लागी लगन’ सुनाने की मांग करते हैं और वे इसे गाते हैं. हालांकि, दीपावली के अवसर पर वे विशेष रूप से ‘दीपावली मनाई सुहानी, मेरे साईं के हाथों में जादू का पानी’ गाना पसंद करते हैं.
दीया मिर्जा से जुड़े विवाद पर अनूप जलोटा ने धार्मिक सौहार्द का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि दीपावली में अली और रमजान में राम है. इस जहान में सबका मालिक एक है. सभी को दीपावली मनाने दीजिए और सभी को ईद मनाने दीजिए. यही हमारे देश की सुंदरता है.
‘रामायण’ फिल्म और उसके संगीत को लेकर हुई चर्चाओं पर भी अनूप जलोटा ने अपनी बात रखी. फिल्म में एआर रहमान के संगीत को लेकर उठे सवालों के संदर्भ में उनसे पूछा गया कि एक गाने में सूफी या गजल शैली की झलक होने की बात कही जा रही है. उन्होंने कहा कि एआर रहमान हर तरह का संगीत बनाते हैं और बहुत अच्छा संगीत तैयार करते हैं. पूरी दुनिया उनके संगीत को पसंद करती है. किसी फिल्म में कौन सा गाना शामिल किया जाना है और कौन सा नहीं, इसका फैसला निर्देशक और निर्माता करते हैं. इसलिए किसी गाने में कव्वाली की झलक होने पर रहमान को दोष देना उचित नहीं है. गाने का चयन निर्देशक और निर्माता की जिम्मेदारी है. ऐसे में दर्शकों को संगीत सुनना चाहिए और उसका आनंद लेना चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि धीरे-धीरे लोग उस गाने को सुनेंगे तो उन्हें पसंद आने लगेगा. युवा पीढ़ी को ध्यान में रखकर फिल्म में संगीत तैयार करने के सवाल पर जलोटा ने कहा कि आजकल फिल्मों में युवाओं की पसंद को ध्यान में रखा जाता है. दृश्यों और संवादों को भी इस तरह प्रस्तुत किया जाता है कि युवा उन्हें समझ सकें और पसंद करें. उन्होंने खुशी जताई कि फिल्म को युवा पीढ़ी को ध्यान में रखकर बनाया गया है.
दीपावली पर युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए अनूप जलोटा ने पटाखे जलाते समय सावधानी बरतने की अपील की. उन्होंने कहा कि ऐसे पटाखे न जलाएं, जिनसे किसी को चोट लगने का खतरा हो. तेज आवाज वाले बमों से पड़ोसियों को रातभर परेशानी हो सकती है, इसलिए पटाखे जलाने का समय तय होना चाहिए. उन्होंने कम धुआं छोड़ने वाले पटाखों के इस्तेमाल और प्रदूषण का ध्यान रखने की भी सलाह दी.
–
/एबीएम
Skip to content