
Bhopal , 30 अक्टूबर . Chief Minister मोहन यादव ने कहा कि आजादी के बाद India के लोकतंत्र को जीवंत और मजबूत बनाए रखने में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. देश की गौरवशाली न्यायिक परंपरा, बार और बेंच के बीच समन्वय तथा संविधान के प्रति प्रतिबद्धता ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती प्रदान की है. दुनिया के कई देशों में Political और सामाजिक उथल-पुथल के बीच India सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में मजबूती से खड़ा है. इसका श्रेय हमारी न्यायपालिका और न्याय परंपरा को जाता है.
Chief Minister मोहन यादव Friday को जबलपुर में महाधिवक्ता कार्यालय द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे. समारोह में मुख्यमंत्री मोहन यादव और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे का अभिनंदन किया गया.
सीएम मोहन यादव ने कहा कि India की न्याय परंपरा केवल संवैधानिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति, साहित्य और सामाजिक जीवन में भी न्याय के आदर्श गहराई से जुड़े हुए हैं. मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘पंच परमेश्वर’ से लेकर ‘मदर इंडिया’ जैसी फिल्मों तक में न्याय, नैतिकता और कर्तव्य के उदाहरण देखने को मिलते हैं. यह भारतीय समाज में न्याय और नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है.
उन्होंने कहा कि India की लोकतांत्रिक परंपरा ने अनेक कठिन दौर देखे हैं. आपातकाल के समय भी न्यायपालिका की भूमिका और उसके फैसले देश के लोकतांत्रिक इतिहास में महत्वपूर्ण रहे हैं. उन्होंने कहा कि India की न्याय व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं ने लोकतंत्र की मूल भावना को बनाए रखने में योगदान दिया है.
Chief Minister मोहन यादव ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में देश की न्याय व्यवस्था को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए अंग्रेजों के जमाने के पुराने कानूनों को समाप्त कर नए कानून लागू किए गए हैं. उन्होंने बताया कि प्रदेश में भी हमारी Government ने 900 से अधिक अनुपयोगी कानून समाप्त किए हैं. इनमें कई ऐसे पुराने कानून थे, जिनकी वर्तमान समय में कोई उपयोगिता नहीं रह गई थी. ऐसे कानूनों को समाप्त कर शासन व्यवस्था को समयानुकूल बनाने का प्रयास किया गया है.
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती इसी में है कि न्यायालय अपना काम स्वतंत्र रूप से करे और जनता द्वारा चुनी गई Government अपने दायित्वों का निर्वहन करे. दोनों संस्थाओं की अपनी-अपनी संवैधानिक मर्यादाएं और जिम्मेदारियां हैं. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई बार यह समझना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है कि किस विषय में ज्ञापन देना चाहिए और किस मामले में न्यायालय की शरण लेनी चाहिए.
Chief Minister ने पड़ोसी देशों नेपाल, बांग्लादेश और Pakistan की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि India दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक और सर्वाधिक आबादी वाला देश है. इसके बाद भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का दृढ़ता से कायम रहना गौरव की बात है. इसमें न्यायपालिका, बार और न्यायिक परंपरा का महत्वपूर्ण योगदान है.
उन्होंने Madhya Pradesh हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे का न्यायधानी जबलपुर में स्वागत करते हुए उनके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दी. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि न्यायमूर्ति श्री कोगजे के कार्यकाल में प्रदेश में और उत्कृष्ट न्याय परंपरा स्थापित होगी.
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने अभिनंदन समारोह में कहा कि जबलपुर केवल संस्कारधानी ही नहीं, बल्कि न्यायधानी के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान रखता है. यहां Madhya Pradesh हाई कोर्ट होने के कारण इसे न्यायधानी के रूप में भी जाना जाता है. उन्होंने कहा कि यह अवसर केवल अभिनंदन का नहीं, बल्कि न्याय के संकल्प और उसके प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का भी है. साथ ही कहा कि न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का आधार है.
Madhya Pradesh हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अलपेश यशवंत कोगजे ने कहा कि बार और बेंच न्याय प्रशासन के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं. दोनों की भूमिकाएं भले ही अलग-अलग हों, लेकिन उनका अंतिम उद्देश्य संविधान की रक्षा करना, नागरिकों के अधिकारों को सुरक्षित रखना और बिना किसी भय या पक्षपात के निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना है. बार और बेंच के बीच संबंध आपसी सम्मान, संस्थागत स्वतंत्रता, पेशेवर ईमानदारी और विधि के शासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित होना चाहिए.
न्यायमूर्ति कोगजे ने कहा कि न्यायिक कार्यवाही के दौरान विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इनका समाधान हमेशा पेशेवर शिष्टाचार और न्याय के प्रति साझा समर्पण के साथ होना चाहिए. बार और बेंच के बीच बेहतर संबंध न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. न्यायमूर्ति श्री कोगजे ने महाधिवक्ता श्री प्रशांत सिंह की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि न्याय प्रणाली को अधिक सुलभ, संवेदनशील और प्रभावी बनाने मिलकर काम करना होगा.
न्यायमूर्ति कोगजे ने Chief Minister मोहन यादव, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, न्यायमूर्ति विवेक रुसिया, न्यायमूर्ति विवेक सिंह, महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं और अन्य अतिथियों की उपस्थिति के प्रति आभार व्यक्त किया.
मुख्य न्यायाधीश ने महाधिवक्ता कार्यालय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह न्यायिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ और हितधारक है. महाधिवक्ता की जिम्मेदारी केवल Government का पक्ष रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
उन्होंने कहा कि महाधिवक्ता प्रशांत सिंह इस जिम्मेदारी का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर रहे हैं. उन्होंने महाधिवक्ता कार्यालय को एक विश्वविद्यालय के समान बताते हुए कहा कि यहां अधिवक्ताओं को व्यापक अनुभव और सीखने के अवसर मिलते हैं. इससे न केवल उनकी पेशेवर क्षमताओं का विकास होता है, बल्कि उन्हें समाज में बड़ी जिम्मेदारियां निभाने के लिए भी तैयार किया जाता है. उन्होंने अपने गृह राज्य में महाधिवक्ता कार्यालय से मिले अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि वे स्वयं भी इस व्यवस्था से लाभान्वित रहे हैं.
मुख्य न्यायाधीश कोगजे ने अधिवक्ताओं से कहा कि वे अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों को समझें और समाज में अपनी भूमिका को गरिमा के साथ निभाएं. उन्होंने सभी अधिवक्ताओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करें और अपने कार्यों से सम्मान अर्जित करें. उन्होंने सभी से अपने-अपने संस्थागत दायित्वों का सम्मान करते हुए मिलकर न्याय वितरण प्रणाली को अधिक सुलभ, उत्तरदायी और प्रभावी बनाने का आह्वान किया.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति रुसिया ने जबलपुर में वकालत के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने यहां वकालत की और बाद में न्यायाधीश बने. उन्होंने कहा कि वकालत ऐसा पेशा है, जिसमें पीढ़ी दर पीढ़ी परिवारों के लोग जुड़ते रहते हैं. एक पीढ़ी के बाद दूसरी और तीसरी पीढ़ी इस पेशे को आगे बढ़ाती है. यह व्यवस्था और पेशे की स्वाभाविक प्रक्रिया है.
Madhya Pradesh के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि न्यायपालिका और विधायिका के समन्वय से ही प्रदेश में प्रत्येक नागरिक को सहजता से त्वरित और निष्पक्ष न्याय उपलब्ध कराने का उद्देश्य पूरा हो सकता है. साथ ही राज्य विकास और प्रगति के नए आयाम स्थापित कर सकता है. उन्होंने कहा कि इन दोनों संवैधानिक संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करने में उनके नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका है.
अभिनंदन समारोह में Madhya Pradesh हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता मृगेन्द्र सिंह, Madhya Pradesh हाई कोर्ट एडवोकेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर सिंह, सीनियर एडवोकेट काउंसिल के अध्यक्ष मोहन शर्मा, और जिला बार एसोसिएशन जबलपुर के अध्यक्ष मनीष मिश्रा का अभिनंदन किया गया.
न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह, उच्च न्यायालय के न्यायमूर्तिगण, राज्यसभा सदस्य सुमित्रा वाल्मीकि, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, सांसद आशीष दुबे, विधायक अशोक रोहाणी, नीरज सिंह, डॉ. अभिलाष पांडे एवं संतोष बरकड़े, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, जेडीए अध्यक्ष संदीप जैन, जेडीए उपाध्यक्ष प्रशांत केशरवानी, नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, अखिलेश जैन, रत्नेश सोनकर, राजकुमार पटेल तथा अधिवक्तागण, बार एसोसिएशन के पदाधिकारी उपस्थित थे.
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डीकेपी/
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