सनातन धर्म के खिलाफ हो रहे सुनियोजित हमले: बाबा रामदेव

हरिद्वार, 28 अक्टूबर . योग गुरु बाबा रामदेव ने Wednesday को आरोप लगाया कि सनातन धर्म के खिलाफ सुनियोजित और व्यवस्थित तरीके से हमले किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हिंदू देवी-देवताओं के बारे में कथित रूप से गलत और अपमानजनक दावे कर सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है.

पत्रकारों से बातचीत में रामदेव ने कहा कि भगवान राम और माता सीता के खिलाफ झूठ फैलाया जा रहा है. वहीं, भगवान शिव के खिलाफ झूठा बयान दिया जा रहा है.

उन्होंने भगवान कृष्ण की रासलीला की गलत व्याख्या किए जाने, भगवान ब्रह्मा के संबंध में लगाए जाने वाले आरोपों और हिंदू देवी-देवताओं को अनैतिक दिखाने के प्रयासों पर भी आपत्ति जताई.

रामदेव ने आरोप लगाया कि पिछले लगभग एक हजार वर्षों में, मुगल काल और अंग्रेजी शासन के दौरान, सनातन धर्म के विरोधियों ने धर्मग्रंथों में बदलाव कर और गलत व्याख्याएं जोड़कर धर्म को बदनाम करने का प्रयास किया.

उन्होंने कहा कि कुछ लोग हिंदू देवी-देवताओं को आर्थिक आधार पर भी बांटने की कोशिश कर रहे हैं. रामदेव के मुताबिक, हाल के दिनों में यह कहा गया कि भगवान राम अमीरों के देवता हैं, क्योंकि उन्हें 56 भोग और विशेष सजावट अर्पित की जाती है, जबकि भगवान शिव को गरीबों का देवता बताया गया. उन्होंने इसे समाज और धर्म में विभाजन पैदा करने की कोशिश बताया.

रामदेव ने कहा कि एक तरफ कुछ लोग हिंदू देवी-देवताओं के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं और दूसरी तरफ उनके निजी जीवन को लेकर आरोप लगाते हैं. यह विरोधाभासी और भ्रामक रवैया है.

उन्होंने India के मुस्लिम समुदाय की पृष्ठभूमि को लेकर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि कई मुसलमान स्वयं स्वीकार करते हैं कि उनके पूर्वज हिंदू परंपराओं का पालन करते थे. उन्होंने दावा किया कि दुनिया भर में सनातन धर्म के 150 करोड़ से अधिक अनुयायी हैं और यदि अखंड India की अवधारणा को जोड़ा जाए तो यह संख्या 200 करोड़ से अधिक हो सकती है.

आर्य आक्रमण या आर्य प्रवास सिद्धांत को खारिज करते हुए रामदेव ने कहा कि आर्य बाहर से India नहीं आए थे. उनका दावा था कि दुनिया के विभिन्न देशों की यात्राओं के दौरान उन्हें यह महसूस हुआ कि India के लोग अन्य क्षेत्रों में गए, न कि आर्य बाहर से India आए.

उन्होंने कहा कि लोग आमतौर पर तीन कारणों से दूसरे देशों में जाते हैं, जिनमें ज्ञान प्राप्त करना, रोजगार की तलाश करना और व्यापार का विस्तार करना शामिल है. उन्होंने विद्वानों द्वारा ज्ञान के प्रसार और अपने योग प्रचार अभियानों का उदाहरण भी दिया.

रामदेव ने यह भी आरोप लगाया कि आर्यों के बाहर से आने, “मूल निवासी” की अवधारणा को बढ़ावा देने और ब्राह्मणों के खिलाफ नारेबाजी जैसे मुद्दों का इस्तेमाल समाज को बांटने के लिए किया जाता है.

उन्होंने कहा, “हम एक बात स्पष्ट रूप से कहते हैं कि आर्य बाहर से नहीं आए थे. इस देश में आर्यों और द्रविड़ों के बीच किसी प्रकार का संघर्ष नहीं था.”

बता दें कि रामदेव की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब धार्मिक परंपराओं, प्राचीन ग्रंथों की व्याख्याओं और India की सांस्कृतिक एवं सामाजिक उत्पत्ति से जुड़े ऐतिहासिक दृष्टिकोणों पर बहस जारी है.

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एएमटी/डीकेपी