
New Delhi, 7 सितंबर . दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में Monday को जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू हो गई है. कोर्ट ने इस हादसे पर कड़ी टिप्पणी करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय, एमसीडी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, दिल्ली Government, केंद्र Government और दिल्ली Police को नोटिस जारी किया है.
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि दिल्ली में हर कुछ महीनों के अंतराल पर ऐसी घटनाएं होती हैं, जहां निर्दोष लोग अपनी जान गंवा देते हैं. कभी आग लगती है, कभी पानी भरता है तो कभी इमारत ढह जाती है. इसमें दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी को कुछ ठोस करना चाहिए.
इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया और टिप्पणी की कि हमें लगता है कि इन सरकारी प्रशासनिक अधिकारियों को अधिक गहन और अर्थपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है.
कोर्ट ने कहा कि जो इमारतें ढही हैं, उनमें पास ही स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र रहते थे. यह आम जानकारी है कि डीयू बाहर से आने वाले अपने छात्रों को पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं प्रदान नहीं करता, जिसके कारण छात्र पीजी में रहने के लिए मजबूर हैं. Government अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती. 50 युवा छात्रों की जिंदगी खतरे में है. उनमें से ज्यादातर शायद अभी मलबे के नीचे पड़े होंगे, इससे ज्यादा दुख की बात और कुछ नहीं हो सकती.
अदालत ने Government को सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में फंसे छात्रों को बचाने की कोशिशें दोगुनी करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि हादसे की जिम्मेदारी सिर्फ पीजी मालिक की नहीं हो सकती. एमसीडी और अन्य संबंधित प्राधिकरणों की भी जिम्मेदारी है कि दिल्ली में होने वाला हर निर्माण भवन नियमों और लागू कानूनों के अनुरूप हो.
अदालत ने कहा कि यदि अधिकारी अपने वैधानिक कर्तव्यों के प्रति सचेत होते तो संभव है कि ऐसी घटना को टाला जा सकता था. हाईकोर्ट ने एमसीडी को निर्देश दिया कि वह जांच करे कि ढही इमारत वैध अनुमति और भवन उपनियमों के तहत बनाई गई थी या नहीं. साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई की जानकारी देने को कहा गया है.
एमसीडी को एक सप्ताह के भीतर अपने अधिकार क्षेत्र के सभी पीजी हॉस्टलों का निरीक्षण कर यह बताने का निर्देश दिया गया है कि वे स्वीकृत अनुमति और भवन उपनियमों के अनुरूप हैं या नहीं और इनमें कितने छात्र रह रहे हैं.
अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पूछा है कि उसके कॉलेजों में कितने बाहरी राज्यों से आए छात्र पढ़ रहे हैं और विश्वविद्यालय या Government द्वारा कितने हॉस्टल संचालित किए जा रहे हैं. अदालत ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में हॉस्टल की संख्या बेहद कम है, जबकि देशभर से छात्र पढ़ने के लिए दिल्ली आते हैं और उन्हें मजबूरी में पीजी में रहना पड़ता है.
कोर्ट ने पीजी हॉस्टलों के लिए स्पष्ट नियमों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि छात्रों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने Government से छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधाएं बढ़ाने और इस दिशा में प्रयास तेज करने को कहा. अदालत ने टिप्पणी की कि छात्रों के लिए हॉस्टल में निवेश करना वास्तव में छात्रों के भविष्य में निवेश करना है.
सुनवाई के दौरान केंद्र, एमसीडी और दिल्ली Police की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए. उन्होंने कहा कि वह दिल्ली Government, केंद्र Government और एमसीडी की ओर से पेश हो रहे हैं. एसजी तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि Government मामले की सक्रिय रूप से निगरानी कर रही है और सभी संबंधित पक्षों के हित में निर्णय लेने के लिए कुछ समय की आवश्यकता है. Government ने आश्वासन दिया कि वह कोई कसर नहीं छोड़ेगी.
अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए 10 दिनों में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. इस मामले पर अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी.
–
एससीएच/
Skip to content